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जांच रिपोर्ट में देरी: प्यासे शहर को मिल रहा बदबूदार पानी,मंच का हल्ला बोल



जबलपुर। शहर में पीने के पानी की पाइप लाइनों के नालियों से होकर गुजरने और घरों में दूषित जल की आपूर्ति होने का मामला अब गहराता जा रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा गठित विशेष समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने आरोप लगाया है कि समिति के गठन को एक माह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन धरातल पर जांच की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है। इस गंभीर स्थिति को लेकर मंच के प्रतिनिधियों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

​जर्जर पाइप लाइनों से बढ़ता जन स्वास्थ्य का खतरा

​शहर में पेयजल आपूर्ति के लिए बिछाई गई पाइप लाइनों का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा नालियों के भीतर से होकर गुजर रहा है। ये पाइप लाइनें करीब 40 से 50 वर्ष पुरानी हो चुकी हैं, जो कई स्थानों पर पूरी तरह क्षतिग्रस्त और जर्जर अवस्था में हैं। पाइपों के कमजोर होने के कारण नालियों का गंदा और दूषित पानी सीधे पेयजल में मिल रहा है। इसके परिणामस्वरूप उपभोक्ताओं के घरों में दुर्गंधयुक्त और मटमैले पानी की सप्लाई हो रही है, जो स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है।

​ट्रिब्यूनल के निर्देशों के क्रियान्वयन में बड़ी लापरवाही

​प्रदूषित जल आपूर्ति की समस्या को लेकर डॉ. पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने 16 मार्च को एक विशेष समिति का गठन किया था। समिति को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वह स्थल निरीक्षण कर एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस समिति की नोडल एजेंसी बनाया गया था, जबकि कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को इसमें सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल निर्धारित थी, लेकिन तय समय सीमा बीतने के बाद भी जांच प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।

​नोडल एजेंसी और अन्य सदस्यों की उदासीनता का आलम

​नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच का दावा है कि नोडल एजेंसी के रूप में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने केवल पत्र व्यवहार तक ही अपनी भूमिका सीमित रखी है। वहीं, जिला प्रशासन और नगर निगम की ओर से समिति के लिए अब तक अपने प्रतिनिधियों का नामांकन तक नहीं किया गया है। प्रशासनिक देरी के कारण जांच का काम पूरी तरह अटका हुआ है। इस विषय पर हुई चर्चा के दौरान क्षेत्रीय अधिकारी केपी सोनी और वैज्ञानिक अंजना इक्का उपस्थित रहीं। मंच की ओर से प्रतिनिधिमंडल में एडवोकेट वेदप्रकाश अधौलिया, मनीष शर्मा और एडवोकेट ब्रजेश साहू शामिल थे।

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