नई दिल्ली। रेलवे में सालों से चले आ रहे एक बड़े विवाद का अंत हो गया है। इससे अब ट्रेन चलाने वाले लोको पायलटों के लिए अधिकारी बनने का सपना सच हो सकेगा। रेलवे बोर्ड ने एक नया आदेश जारी करते हुए लोको पायलटों और स्टेशनरी स्टाफ (जैसे एसएसई/जेई) के बीच प्रमोशन को लेकर चल रही विसंगति को दूर कर दिया है।
लोको पायलटों के पद बड़े इंजीनियरों के समकक्ष होगा
रेलवे बोर्ड ने अब एक नया इक्विवेलेंस मैट्रिक्स यानी बराबरी का पैमाना तय किया है। इसके तहत प्रमोशन के समय लोको पायलटों के पद को बड़े इंजीनियरों के समकक्ष माना जाएगा। अभी तक सबसे बड़ी समस्या यह थी कि एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों के लोको पायलट पे-लेवल छह में आते थे, जबकि इंजीनियर पे-लेवल सात में। इस अंतर की वजह से सीनियरिटी लिस्ट और प्रमोशन में ड्राइवरों को काफी नुकसान होता था।
मालगाड़ी के लोको पायलट भी लेवल सात के बराबर
अब नए नियमों के अनुसार, मेल, एक्सप्रेस और पैसेंजर ड्राइवरों को प्रमोशन के उद्देश्य से सीधे लेवल सात के बराबर दर्जा दे दिया गया है। इसी तरह मालगाड़ी के लोको पायलटों को भी लेवल सात के बराबर माना जाएगा। इस नए फार्मूले के तहत रेलवे ने माना है कि मेल, एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों के लोको पायलट भले ही पे-लेवल छह में काम कर रहे हों, लेकिन उनकी जिम्मेदारी और अनुभव को देखते हुए प्रमोशन के वक्त उन्हें लेवल सात के बराबर ही माना जाएगा।
ऑफिसर रैंक तक नहीं पहुंच पाते थे एलपी
मालगाड़ी के ड्राइवरों को भी इसी श्रेणी में रखा गया है। यह फैसला उन विसंगतियों को दूर करता है जिनके कारण ड्राइवर योग्यता के बावजूद इंजीनियरों से प्रमोशन की दौड़ में पिछड़ जाते थे। जिसके कारण लोको पायलट योग्यता के बावजूद ऑफिसर रैंक (ग्रुप बी) तक नहीं पहुंच पाते थे।
लोको पायलट पर हजारों यात्रियों की सुरक्षा का जिम्मा
रेलवे में लोको पायलट और जूनियर इंजीनियर (जेई) दोनों की भर्ती प्रक्रिया अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है। जहां जूनियर इंजीनियर के लिए संबंधित ट्रेड में तकनीकी डिप्लोमा या डिग्री अनिवार्य होती है, वहीं लोको पायलट के लिए भी आईटीआई या इंजीनियरिंग डिप्लोमा के साथ-साथ कठिन मनोवैज्ञानिक परीक्षण (एप्टीट्यूड टेस्ट) और उच्च स्तरीय मेडिकल मानकों को पूरा करना होता है। एक लोको पायलट को हजारों यात्रियों और करोड़ों की संपत्ति की सुरक्षा का जिम्मा दिया जाता है, जिसके लिए उन्हें वर्षों तक आन-ट्रैक ट्रेनिंग और तकनीकी कौशल विकसित करना पड़ता है।
ये है रेलवे बोर्ड का आदेश
रेलवे बोर्ड की संयुक्त निदेशक (स्थापना) आरती सिंह लाल द्वारा नौ अप्रैल को जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि प्रमोशन के लिए एकीकृत वरिष्ठता सूची तैयार करते समय लोको रनिंग स्टाफ के अनुभव को प्राथमिकता दी जाएगी। इस आदेश के अनुसार मेल, एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेन के लोको पायलटों (लेवल छह) को स्टेशनरी स्टाफ (एसएसई/जेई) के लेवल सात के बराबर माना गया है।
त्वरित निर्णय लेने की क्षमता
लोको पायलटों का वे हाई-स्पीड इंजनों और जटिल सिग्नलिंग प्रणालियों के साथ काम करते हैं। तकनीकी समझ और परिचालन कौशल एक जूनियर इंजीनियर के सैद्धांतिक और व्यावहारिक ज्ञान के समकक्ष है। आपातकालीन ब्रेक लगाना या तकनीकी खराबी को ट्रैक पर ही ठीक करना उनकी त्वरित निर्णय लेने की क्षमता एक अधिकारी स्तर के समान है।
