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30 हजार कर्मचारियों का वेतन 'लापता', फाइलों के खेल में उलझा भविष्य



जबलपुर। जबलपुर सहित पूरे प्रदेश में भू-अभिलेख विभाग के अंतर्गत आने वाले हजारों कर्मचारियों के लिए मौजूदा समय आर्थिक तंगी का सबब बन गया है। विभाग में हाल ही में लागू की गई पुनर्गठन प्रक्रिया और नई संयुक्त व्यवस्था ने वेतन वितरण के पहिए थाम दिए हैं। स्थिति यह है कि आदेश जारी हुए 13 दिन से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन प्रदेश के लगभग 30 हजार कर्मचारियों के खातों में अब तक उनकी मेहनत की कमाई नहीं पहुंची है। इस देरी ने कर्मचारी वर्ग में भारी असंतोष और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।

​एक आदेश के बाद बदली तस्वीर

​विभागीय ढांचे में व्यापक बदलाव लाने के उद्देश्य से 23 मार्च 2026 को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया था। इस नए नियम के तहत विभिन्न संवर्गों के पदों का समायोजन किया जाना तय हुआ। जिला स्तर पर डीएलआर यानी डीडीओ कार्यालयों में सहायक ग्रेड-1, सहायक ग्रेड-2 और सहायक ग्रेड-3 जैसे महत्वपूर्ण पदों को समाहित करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए। साथ ही राजस्व निरीक्षक और अन्य संबंधित शाखाओं के कर्मचारियों को सीधे कलेक्टर कार्यालय के अधीन लाने की कवायद शुरू की गई। प्रशासनिक स्तर पर हुए इन बड़े फेरबदल के कारण वेतन आहरण की नियमित प्रक्रिया पूरी तरह से बाधित हो गई है।

​तकनीकी अड़चनें भी कम नहीं

​वेतन भुगतान में हो रहे विलंब का मुख्य कारण नई व्यवस्था के तहत डेटा अपडेट होने में लगने वाला समय बताया जा रहा है। डीडीओ परिवर्तन और कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड को नए पोर्टल या सिस्टम पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी है। कर्मचारियों के वेतन बिल तैयार करने में आ रही तकनीकी दिक्कतों और प्रशासनिक तालमेल की कमी ने इस समस्या को और अधिक जटिल बना दिया है। कर्मचारी संगठन इस बात से खासे नाराज हैं कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए पुरानी व्यवस्था को बदल दिया गया, जिससे उन्हें आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

​समाधान के प्रयास पर अब तक बेनतीजा

​विभागीय अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कुछ बाधाएं आई हैं, जिन्हें दूर करने का प्रयास निरंतर जारी है। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही डेटा माइग्रेशन और डीडीओ मैपिंग का काम पूरा कर लिया जाएगा ताकि वेतन भुगतान की प्रक्रिया पुनः सुचारू रूप से शुरू हो सके। हालांकि, धरातल पर अब तक कोई ठोस परिणाम नजर नहीं आए हैं और स्थिति जस की तस बनी हुई है। महीने का दूसरा सप्ताह बीत जाने के बाद भी वेतन न मिलने से कर्मचारियों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है और वे अब जल्द से जल्द समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।

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