जबलपुर। मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी की तकनीकी रिपोर्ट और संभाग स्तरीय पहल के बाद प्रशासन ने अति उच्च दाब क्षेत्रों के आसपास होने वाले हर प्रकार के उत्खनन को प्रतिबंधित कर दिया है। सतना जिले में विद्युत आपूर्ति की लाइफलाइन माने जाने वाले ट्रांसमिशन टावरों और सबस्टेशन की सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। यह निर्णय विद्युत अधोसंरचना को मजबूती प्रदान करने और भविष्य में होने वाली किसी भी बड़ी दुर्घटना को टालने के उद्देश्य से लिया गया है।
कमजोर हो रही थी टावरों की नींव
मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस संभाग ने पिछले कुछ समय से टावरों की नींव के पास हो रही खुदाई को लेकर चिंता जताई थी। सतना के सितपुरा स्थित 220 केवी एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशन और उससे जुड़ी विभिन्न लाइनों के आसपास मिट्टी और मुरम का उत्खनन बड़े पैमाने पर किया जा रहा था। तकनीकी जांच में यह पाया गया कि टावरों के बेस के पास गहराई तक खुदाई होने से उनकी पकड़ कमजोर हो रही थी। लगातार हो रहे इस कटाव के कारण 220 केवी और 132 केवी की भारी-भरकम टावर संरचनाओं के गिरने का खतरा बढ़ गया था।
प्रशासनिक हस्तक्षेप से लग सकी रोक
इस गंभीर समस्या को देखते हुए ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस संभाग सतना के कार्यपालन अभियंता अमित कुमार ने प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी पैरवी की। उन्होंने तकनीकी तथ्यों के साथ प्रशासन को बताया कि यदि उत्खनन नहीं रुका तो टावर ध्वस्त हो सकते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र की बिजली व्यवस्था ठप हो सकती है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने नागौद क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू कर दी। इसके तहत अब चिन्हित क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का वैध या अवैध उत्खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
निर्बाध बिजली आपूर्ति की दिशा में कदम
प्रशासनिक प्रतिबंध लगने से अब एमपी ट्रांसको के टावरों की संरचनात्मक स्थिरता सुरक्षित हो गई है। इससे न केवल सरकारी संपत्ति की रक्षा होगी बल्कि ग्रिड फेलियर जैसी संभावनाओं पर भी विराम लगेगा। सबस्टेशन और टावरों के आसपास खुदाई पर रोक लगने से मानसून के दौरान होने वाले भू-क्षरण से भी बचाव होगा। विभाग अब इन क्षेत्रों में नियमित निगरानी कर रहा है ताकि विद्युत पारेषण में कोई बाधा न आए और ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों को मिलने वाली बिजली आपूर्ति निरंतर जारी रहे।
