जबलपुर। रेल फाटकों के लॉक न होने के कारण ट्रेनों को अक्सर बाहरी सिग्नलों (आउटर) पर खड़ा होना पड़ता है। अब यह समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी। जब तक फाटक का कांटा लाक नहीं होगा तब तक सिग्नल हरा नहीं होगा।
देशभर के 3,266 व्यस्त लेवल क्रासिंग (रेल फाटक) को 15 जून 2026 तक अनिवार्य रूप से इंटरलाक'किए जाएंगे। इससे रेल फाटक और ट्रेनों का सिग्नल एक-दूसरे से डिजिटल रूप से जुड़ जाएंगे। उत्तर रेलवे (एनआर) में सर्वाधिक 878, पूर्व मध्य रेलवे (ईसीआर) में 432, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) में 378,पश्चिम मध्य रेलवे जबलपुर में 120 फाटक शामिल है।
रेलवे बोर्ड का निर्देश
रेलवे बोर्ड के प्रिंसिपल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राजेश गुप्ता ने उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह सहित समस्त जोन को पत्र जारी कर कहा है कि जिन फाटकों भारी ट्रैफिक है, उन्हें प्राथमिकता पर रखें। जिन क्रासिंग से प्रतिदिन न्यूनतम 1500 बस-कार आवागमन करते हैं पूरे देश में ऐसे 3,266 फाटक चिह्नित किए गए हैं, जिनमें से 1,228 पर काम की मंजूरी मिल चुकी है।
यात्रा में समय की होगी बचत
रेलवे इन फटाक को टीवीयू (ट्रेन व्हीकल यूनिट) 50,000 से अधिक वाली ए श्रेणी में रखता है। वर्तमान में फाटकों के लाक न होने के कारण ट्रेनों को अक्सर बाहरी सिग्नलों (आउटर) पर खड़ा होना पड़ता है। इंटरलाकिंग होने से ट्रेनों का 'थ्रू-मूवमेंट' सुनिश्चित होगा, जिससे यात्रा का समय कम होगा और रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी। सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि इंटरलाकिंग प्रोजेक्ट न केवल दुर्घटनाओं को रोकेगा, बल्कि यात्रियों को निर्बाध यात्रा का अनुभव देगा।
रेलवे जोन चिह्नित फाटक (नान-इंटरलाक्ड) काम स्वीकृत/प्रगति पर
उत्तर रेलवे 878 270
पूर्व मध्य रेलवे 432 104
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे 378 121
पूर्वोत्तर रेलवे 269 102
दक्षिण पूर्व रेलवे 191 82
दक्षिण रेलवे 183 181
पूर्व तटीय रेलवे 147 50
दक्षिण पश्चिम रेलवे 143 80
दक्षिण मध्य रेलवे 125 61
उत्तर पश्चिम रेलवे 123 48
पश्चिम रेलवे 120 22
उत्तर मध्य रेलवे 89 50
पश्चिम मध्य रेलवे 59 13
पूर्वी रेलवे 56 09
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे 42 29
मध्य रेलवे 31 06
कुल 3,266 1,228
