जबलपुर/कटनी. 167 मुस्लिम बच्चों और उनके 8 शिक्षकों को मानव तस्करी के संदेह में कटनी स्टेशन पर ट्रेन से उतारे जाने का मामला अब राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन गया है। इस घटना को लेकर मुस्लिम समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल ने मऊगंज कांग्रेस विधायक राहुल सिंह से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बच्चों की तत्काल ससम्मान घर वापसी या मदरसे भेजने की मांग की है।
यह घटना 11 अप्रैल 2026 को हुई थी। पटना-पुणे एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 17609) के स्लीपर कोच (एस2, एस3, एस4) में 6 से 15 वर्ष की आयु के लगभग 167 बच्चे अपने शिक्षकों के साथ यात्रा कर रहे थे। शाम करीब 6:30 बजे कटनी जंक्शन पर पुलिस ने मानव तस्करी के संदेह में इन सभी को ट्रेन से उतार लिया। मुस्लिम परिषद का आरोप है कि पुलिस ने बिना किसी ठोस साक्ष्य या प्रारंभिक जांच के तुरंत एफआईआर दर्ज कर ली। इसके बाद बच्चों को कटनी और जबलपुर के बाल कल्याण समिति केंद्रों में भेज दिया गया।
तत्काल ससम्मान घर वापसी या मदरसे भेजने की मांग
परिषद ने ज्ञापन में आरोप लगाया है कि यह पूरी कार्यवाही गलत सूचनाओं के आधार पर की गई है और यह एक साजिश का हिस्सा है। परिषद के अनुसार, शंभू रजत नामक व्यक्ति ने इन बच्चों को पहले पटना, मिर्जापुर और सतना स्टेशनों पर भी रोकने की कोशिश की थी, लेकिन वहां के अधिकारियों ने दस्तावेजों की सत्यता पाए जाने पर उन्हें यात्रा जारी रखने दी थी। सभी 167 बच्चों के पास वैध आरक्षित टिकट थे और वे परिजनों की लिखित सहमति से शिक्षा प्राप्त करने के लिए लातूर (महाराष्ट्र) जा रहे थे।
