जांच की गोपनीयता का उल्लंघन करते हुए शिवशंकर कपूर ने रिपोर्ट कलेक्टर तक पहुंचने से पहले ही बयान और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए जिससे जांच की विश्वसनीयता खत्म हो गई
जबलपुर। जबलपुर के शासकीय राज्य अपंग कल्याण संस्थान में एक दृष्टिबाधित छात्र की मृत्यु के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। संस्थान के निलंबित प्रभारी अधीक्षक शिवेंद्र सिंह परिहार ने जिला प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई और जांच समिति की निष्पक्षता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिहार का कहना है कि 22 फरवरी 2026 को अमरकंटक में छात्र शिरीष नामदेव की मृत्यु के बाद प्रशासनिक स्तर पर जो जांच शुरू की गई है वह पूरी तरह से एकपक्षीय है। उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि भ्रमण पर जाने से पहले विभाग से विधिवत अनुमति ली गई थी। इस प्रक्रिया के तहत 21 जनवरी 2026 को संयुक्त संचालक सामाजिक न्याय विभाग को पत्र भेजा गया था और 17 फरवरी 2026 को संस्थान की ओर से पूरी जानकारी विभाग को दी गई थी। 20 फरवरी 2026 को पुनः स्मरण पत्र भेजने के बाद संयुक्त संचालक ने उन्हें टेलीफोन पर मौखिक तौर पर यात्रा की सहमति प्रदान की थी।
जांच समिति के गठन पर उठते सवाल
निलंबित अधीक्षक ने जांच समिति की संरचना पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सहायक संचालक सोनम बर्वे ने 23 फरवरी 2026 को जो समिति बनाई उसमें उन लोगों को सदस्य बनाया गया जो पूर्व में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के दोषी पाए गए थे। इसमें शिवशंकर कपूर और सुरेशचंद्र यादव के नाम प्रमुख हैं। इन दोनों अधिकारियों को 26 दिसंबर 2024 को तत्कालीन कलेक्टर ने उनके पदों से हटा दिया था। शिवशंकर कपूर को अधीक्षक और सुरेशचंद्र यादव को प्राचार्य पद से मुक्त किए जाने के बाद ही इन संस्थानों की जिम्मेदारी शिवेंद्र सिंह परिहार को दी गई थी। परिहार का आरोप है कि उनके अधीनस्थ रहे और कम वेतनमान वाले कर्मचारियों द्वारा उनकी जांच कराया जाना प्रशासनिक नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने यह भी बताया कि जांच की गोपनीयता का उल्लंघन करते हुए शिवशंकर कपूर ने रिपोर्ट कलेक्टर तक पहुंचने से पहले ही बयान और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए जिससे जांच की विश्वसनीयता खत्म हो गई है।
संस्थान में गुटबाजी और नई नियुक्तियों का विरोध
हादसे के विवरण पर बात करते हुए परिहार ने बताया कि वह स्वयं 100 प्रतिशत दृष्टिबाधित हैं और छात्रों के विशेष अनुरोध पर ही उन्हें अमरकंटक ले जाया गया था। वहां 20 छात्रों को 5 कर्मचारियों की निगरानी में स्नान के लिए भेजा गया था। 25 वर्षीय छात्र शिरीष नामदेव जो महाकौशल कॉलेज में एमए का छात्र था एक बार नहाकर सुरक्षित बाहर आ गया था लेकिन बाद में वह बिना किसी को बताए फिर से नदी में चला गया जिससे यह दुर्घटना हुई। घटना के तुरंत बाद जिला प्रशासन को विस्तृत रिपोर्ट भेज दी गई थी। वर्तमान में कलेक्टर ने परिहार को हटाकर सुरेशचंद्र यादव को ही पुनः प्रभारी प्राचार्य नियुक्त कर दिया है। परिहार का दावा है कि उन्होंने संयुक्त संचालक आशीष दीक्षित को पहले ही इन अधिकारियों के विरुद्ध साक्ष्य सहित शिकायत दी थी लेकिन अब उन्हीं को जांच का जिम्मा और प्रभार दे दिया गया है। उन्होंने पूरी प्रक्रिया को विभागीय गुटबाजी का परिणाम बताते हुए न्याय की मांग की है।
