रेल परियोजनाओं में बढ़ती फिजूलखर्ची पर लगी रोक
जबलपुर। भारतीय रेलवे ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में हो रहे अनधिकृत खर्चों पर अंकुश लगाने के लिए सख्त रुख अपनाया है। पश्चिम मध्य रेल ज़ोन सहित अन्य जोनों पर रेलवे बोर्ड ने हजारों करोड़ रुपये के बढ़ते खर्च पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सिस्टम के भीतर वित्तीय अनुशासन को अनिवार्य बनाने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में सभी जोनल रेलवे के महाप्रबंधकों, विभिन्न उत्पादन इकाइयों और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट आदेश भेजे गए हैं ताकि परियोजनाओं के दौरान बिना पूर्व मंजूरी के धन व्यय करने की प्रवृत्ति पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
बिना मंजूरी खर्च की कार्यप्रणाली पर रोक
रेलवे बोर्ड के संज्ञान में यह तथ्य आया है कि कई महत्वपूर्ण मामलों में सक्षम प्राधिकरण से विधिवत अनुमति लिए बिना ही पहले राशि खर्च कर दी जाती है। इसके पश्चात व्यय की गई राशि की मंजूरी के लिए आवेदन किया जाता है, जो स्थापित सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं का सीधा उल्लंघन है। बोर्ड के अनुसार, इस प्रकार की कार्यप्रणाली से न केवल विभाग की वित्तीय पारदर्शिता बाधित होती है, बल्कि पूरे बजट प्रबंधन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे भविष्य की योजनाओं के लिए आवंटित फंड का संतुलन भी बिगड़ता है।
जवाबदेही और पारदर्शिता के नए स्टैंडर्ड
वित्तीय स्थिति में सुधार लाने के लिए रेलवे ने अब यह अनिवार्य कर दिया है कि किसी भी परियोजना में एक भी रुपया खर्च करने से पहले आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति लेना आवश्यक होगा। इसके साथ ही विभाग ने अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने का निर्णय लिया है। वित्तीय नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। रेलवे के इस कदम का मुख्य उद्देश्य अनावश्यक और फिजूलखर्ची पर नियंत्रण रखना, कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाना और सार्वजनिक धन के सदुपयोग को शत प्रतिशत सुनिश्चित करना है।
