बताया गया है कि अस्पताल के पिछले हिस्से में बायोमेडिकल का कचरा एकत्र होता है, जहां पर देर रात अचानक आग गई। आग ने कु छ की देर में विकराल रुप धारण कर लिया, जिसकी लपटें दूर दूर तक दिखाई देने लगी। आग देख अस्पताल परिसर में सो रहे मरीजों के परिजनों में अफरातफरी व भगदड़ मच गई। आग के दौरान शीशियां फूटने से पटाखों जैसी आवाज सुनाई दे रही थी। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि सामान्य कचरे के साथ बायोमेडिकल वेस्ट भी वहां पड़ा था। यहां तक कि संक्रमण फैलने के डर से अधिकतर लोग सड़क पर आ गए थे। खबर मिलते ही फायर बिग्रेड की गाडिय़ां मौके पर पहुंच गई, जिन्होने मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। गौरतलब है कि बायोमेडिकल वेस्ट के लिए रंग वाले अलग-अलग बैग पीला, लाल, सफेद, नीला में कचरा अलग रखना जरूरी होता है। इसे अधिकृत एजेंसी के जरिए कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट भेजा जाता है, जहां मशीनों से नष्ट किया जाता है। यदि सिस्टम लागू है तो अस्पताल परिसर में कचरे का ढेर क्यों जमा था, क्या कचरा समय पर नहीं उठाया गया। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉण् नवनीत सक्सेना ने घटना को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि देर रात आग लगने की जानकारी मिली थी। इसके बाद जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। डीन का कहना है कि जिसने भी लापरवाही की होगी उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मेडिकल अधीक्षक को भी कहा गया है कि बायोमेडिकल कचरे का निपटान तय नियमों के अनुसार ही हो।
जबलपुर। एमपी के जबलपुर स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में देर रात बायोमेडिकल स्टोर के बाहर कचरे के ढेर में भीषण आग लग गई। अस्पताल के पिछले हिस्से में सड़क किनारे जमा कचरे से अचानक लपटें उठीं और देखते ही देखते आग फैल गई। आग देख अस्पताल परिसर में संक्रमण फैलने के खतरे से भगदड़ व अफरातफरी मच गई थी। सूचना मिलते ही दमकल की गाडिय़ां पहुंचीं। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
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