हाईकोर्ट ने ईओडब्ल्यू डीजीपी और लीगल एडवाइजर से मांगा शपथ पत्र
जबलपुर। जबलपुर और डिंडौरी के बस संचालक संजय केशवानी एवं साधना केशवानी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है। यह याचिका आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो यानी ईओडब्ल्यू भोपाल द्वारा उनके विरुद्ध दर्ज की गई एफआईआर को चुनौती देने के लिए पेश की गई है। याचिकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ब्रजेश दुबे ने पैरवी करते हुए न्यायालय को बताया कि बसों के बकाया टैक्स की वसूली के लिए मोटर यान कराधान अधिनियम में स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं। कानून की धारा 8 और 16 के तहत इस तरह की वसूली की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। याचिका में यह तर्क दिया गया है कि जब विशेष अधिनियम में वसूली की व्यवस्था है, तो आपराधिक प्रकरण दर्ज करना वैधानिक रूप से उचित नहीं है।
कराधान अधिनियम के उल्लंघन और क्षेत्राधिकार पर सवाल
अधिवक्ता ब्रजेश दुबे ने दलील दी कि आरटीओ डिंडौरी द्वारा पहले ही टैक्स डिमांड नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इन नोटिसों को भी याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है और यह मामला अभी विचाराधीन है। इसके बावजूद ईओडब्ल्यू ने एक शिकायत के आधार पर सीधे एफआईआर दर्ज कर दी। याचिका में कहा गया कि जब कराधान अधिनियम के तहत विभागीय कार्यवाही और नोटिस की प्रक्रिया चल रही हो, तब उसी मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धाराओं का उपयोग करना नियमों के विपरीत है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कार्यवाही दुर्भावनापूर्ण है और केवल परेशान करने के उद्देश्य से की गई है।
डीजीपी और लीगल एडवाइजर को शपथ पत्र पेश करने का आदेश
इस मामले की प्रारंभिक सुनवाई न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति रत्नेश चंद्र विशेन की युगल पीठ द्वारा की गई। हाईकोर्ट ने याचिककर्ता के वकील द्वारा प्रस्तुत तथ्यों और कानूनी बिंदुओं को गंभीरता से लिया है। न्यायालय ने इस बात पर स्पष्टीकरण मांगा है कि टैक्स वसूली जैसे प्रशासनिक और राजस्व प्रकृति के मामले में भ्रष्टाचार से जुड़ी धाराओं में प्रकरण कैसे दर्ज किया जा सकता है। कोर्ट ने ईओडब्ल्यू के डीजीपी और ईओडब्ल्यू के लीगल एडवाइजर को स्वयं शपथ पत्र दाखिल करने के कड़े निर्देश दिए हैं। इन अधिकारियों को कोर्ट में यह बताना होगा कि किस आधार पर टैक्स बकाया की कार्यवाही को करप्शन एक्ट और बीएनएसएस की धाराओं के तहत अपराध माना गया। न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 मार्च की तिथि निर्धारित की है। अब 17 मार्च को ईओडब्ल्यू को अपना पक्ष रखना होगा कि किस विधिक प्रक्रिया के तहत यह एफआईआर दर्ज की गई है।
