जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित हाई कोर्ट की प्रिंसिपल बेंच में सोमवार को उस समय एक बेहद सनसनीखेज और झकझोर देने वाला मामला सामने आया जब एक व्यक्ति सुरक्षा व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए कोर्ट रूम के भीतर बच्चे का भ्रूण लेकर पहुंच गया। यह घटना तब हुई जब कोर्ट रूम नंबर 17 में सामान्य दिनों की तरह अदालती कार्यवाही संचालित की जा रही थी। अचानक हुई इस वारदात से वहां मौजूद न्यायाधीश, अधिवक्ता और कर्मचारी हतप्रभ रह गए और पूरे परिसर में अफरा तफरी का माहौल निर्मित हो गया। चश्मदीदों के अनुसार संबंधित व्यक्ति ने अपने पास मौजूद एक पॉलिथीन से खून से सना हुआ और दुर्गंध मारता एक लोथड़ा निकाला और उसे सीधे डाइस पर रख दिया। पॉलिथीन के भीतर मौजूद वस्तु किसी बच्चे का कटा हुआ सिर या भ्रूण जैसी प्रतीत हो रही थी। इस दृश्य को देखते ही कोर्ट रूम में शोर मच गया और सुरक्षाकर्मी तुरंत हरकत में आए।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल और पुलिस की कार्रवाई
घटना की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट परिसर की सुरक्षा में तैनात एस ए एफ की टीम तुरंत अलर्ट मोड पर आ गई। सूचना मिलते ही सिविल लाइन और ओमती थाने की पुलिस भी भारी बल के साथ मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उस संदिग्ध व्यक्ति को अपने घेरे में ले लिया और उसके पास मौजूद आपत्तिजनक सामग्री को कब्जे में ले लिया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार कोर्ट रूम नंबर 17 में उस समय क्रम संख्या 35 पर दयानंद पांडे नामक व्यक्ति का कोई मामला सुनवाई के लिए लगा हुआ था। माना जा रहा है कि यह पूरी घटना इसी मामले से जुड़ी हुई है। पुलिस अब इस पहलू पर गहराई से छानबीन कर रही है कि संबंधित व्यक्ति का इस केस से क्या नाता है और उसने इस तरह के खौफनाक कदम को क्यों अंजाम दिया। हाई कोर्ट जैसे अति संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की वस्तु का पहुंचना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करता है। वरिष्ठ अधिकारी इस बात की तफ्तीश कर रहे हैं कि मेटल डिटेक्टर और सघन चेकिंग के बावजूद वह व्यक्ति संदिग्ध सामग्री के साथ भीतर कैसे प्रवेश कर गया।
परिसर में जांच की प्रक्रिया पर सवाल
इस अप्रत्याशित घटना के बाद पूरे कोर्ट रूम को खाली करा दिया गया और वहां साफ सफाई के साथ सैनिटाइजेशन की प्रक्रिया शुरू की गई। पुलिस हिरासत में लिए गए व्यक्ति से अज्ञात स्थान पर पूछताछ कर रही है ताकि घटना के पीछे के वास्तविक उद्देश्यों का पता लगाया जा सके। सिविल लाइन और ओमती पुलिस की टीमें मामले के हर तकनीकी और कानूनी पहलू को खंगाल रही हैं। हाई कोर्ट प्रशासन ने भी इस सुरक्षा चूक को बेहद गंभीरता से लिया है और जिम्मेदार सुरक्षाकर्मियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल पूरे परिसर में चौकसी बढ़ा दी गई है और आने जाने वाले हर व्यक्ति की दोबारा बारीकी से तलाशी ली जा रही है। पुलिस का कहना है कि जब्त किए गए भ्रूण या मानव अंग को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा ताकि उसकी वास्तविकता की पुष्टि हो सके। इस सनसनीखेज कांड ने न केवल कानूनी जगत बल्कि आम जनता के बीच भी सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी कि यह कृत्य किसी मानसिक स्थिति का परिणाम था या इसके पीछे कोई बड़ा विरोध प्रदर्शन अथवा साजिश छिपी थी।
