एक गुप्त मीटिंग और एक बड़ा फैसला...बढ़ने वाले हैं दूध के दाम


दूध की कीमतों में फिर लगेगी आग: मार्च के पहले हफ्ते से जेब पर बढ़ेगा भारी बोझ,अधिकारियों की इसी बेरुखी का फायदा उठाकर डेयरी संचालक अपनी मर्जी से दाम तय करते हैं, जिसका खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ रहा

जबलपुर। जबलपुर में एक बार फिर दूध की कीमतों में बढ़ोत्तरी की सुगबुगाहट तेज हो गई है। डेयरी संचालकों ने मार्च के पहले हफ्ते से दूध के दामों में वृद्धि करने की पूरी तैयारी कर ली है। वर्तमान में शहर में दूध की कीमतें पहले से ही आसमान छू रही हैं, और अब इस नए फैसले से आम जनता का बजट पूरी तरह बिगड़ने वाला है।

 5 रुपये तक बढ़ सकते हैं रेट

​सूत्रों के अनुसार, संस्कारधानी के डेयरी संचालक गुपचुप तरीके से दामों में बड़ी वृद्धि करने की योजना बना रहे हैं। फिलहाल शहर में दूध 72 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है, जिसे बढ़ाकर 75 से 77 रुपये तक करने की तैयारी है। संचालकों का तर्क है कि चारे और रखरखाव की लागत बढ़ने के कारण वे पुराने रेट पर दूध बेचने में असमर्थ हैं। हालांकि, उपभोक्ताओं का कहना है कि हर साल गर्मी शुरू होने से पहले इसी तरह मनमानी की जाती है।

अन्य डेयरी उत्पाद भी होंगे महंगे

​दूध के दाम बढ़ने का सीधा असर केवल चाय या दूध के गिलास तक सीमित नहीं रहेगा। गर्मी की आहट के साथ ही बाजार में दही, मठा (छाछ), पनीर और आइसक्रीम की मांग बढ़ गई है। यदि दूध महंगा होता है, तो इन सभी सहायक उत्पादों की कीमतों में भी भारी उछाल आना तय है। इससे मध्यमवर्गीय परिवारों की रसोई का गणित पूरी तरह गड़बड़ा जाएगा।

परियट और पनागर क्षेत्र में बढ़ी हलचल

​जबलपुर जिले का परियट और पनागर क्षेत्र दूध उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। यहाँ की डेयरियों में 25 हजार से अधिक भैंसे हैं और पूरे महाकौशल क्षेत्र में यहीं से सबसे ज्यादा सप्लाई होती है। स्थानीय उत्पादकों का कहना है कि गर्मी बढ़ने के साथ ही उत्पादन में कमी आती है और मांग बढ़ जाती है, जिसका फायदा उठाकर बिचौलिए और संचालक रेट बढ़ाने का दबाव बनाते हैं।

प्रशासन की चुप्पी, 20 साल पुरानी मांग

​पिछले दो दशकों से यह मांग उठ रही है कि दूध को 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' के दायरे में लाया जाए ताकि इसकी कीमतों पर प्रशासन का नियंत्रण रहे। लेकिन अब तक न तो शासन ने और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाया है। अधिकारियों की इसी बेरुखी का फायदा उठाकर डेयरी संचालक अपनी मर्जी से दाम तय करते हैं, जिसका खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ रहा है।

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