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तमाशे जैसी जांच: रिपोर्ट में बैंक स्टेटमेंट को भी लिख दिया 'झूठा',अब एफआईआर की नौबत

जबलपुररामपुर हाई स्कूल में हुए छात्रवृत्ति घोटाले की स्थानीय जांच रिपोर्ट को भोपाल मुख्यालय ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। पूर्व प्राचार्य किशन रायखेड़े के कार्यकाल के दौरान हुई इस वित्तीय अनियमितता की समीक्षा में मुख्यालय के अधिकारियों ने कई गंभीर खामियां और तथ्यात्मक विसंगतियां पाई हैं। स्थानीय स्तर पर तैयार की गई रिपोर्ट को भ्रामक और तथ्यों से परे माना गया है। इस प्रकरण में विभाग ने अब पूर्व प्राचार्य के खिलाफ नए सिरे से जांच शुरू करते हुए नोटिस जारी किया है। मुख्यालय के इस कड़े रुख से शिक्षा विभाग के उन अधिकारियों में हड़कंप है जो पिछले काफी समय से इस संवेदनशील मामले को रफा-दफा करने की कोशिशों में लगे थे।

​शिक्षकों और भृत्य के माध्यम से राशि का गबन

​इस घोटाले की कार्यप्रणाली में सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन सामने आया है। नियमों के अनुसार छात्रवृत्ति की राशि केवल छात्रों के कल्याण और उनके बैंक खातों के लिए निर्धारित होती है, लेकिन रामपुर स्कूल में इस राशि को स्कूल के ही शिक्षकों और भृत्य के नाम पर चेक जारी करके निकाला गया। इन चेकों के माध्यम से बैंक से नकद राशि प्राप्त की गई और उसे अन्य मदों में खर्च करना दिखाया गया। सबसे बड़ी अनियमितता यह है कि जिन कार्यों में इस राशि का उपयोग बताया गया है, उनके समर्थन में विभाग के पास कोई भी वैध बिल या वाउचर मौजूद नहीं है। बिना किसी दस्तावेजी प्रमाण के छात्रवृत्ति की राशि को निजी खातों या अन्य मदों में डायवर्ट करना सीधे तौर पर गबन की श्रेणी में आता है।

​दो साल की लंबी जांच,फिर भी त्रुटिपूर्ण

​भ्रष्टाचार का यह जिन्न साल 2024 में उस समय बाहर आया जब वर्तमान प्राचार्य विशाल झरिया ने अपनी पड़ताल में बड़ी आर्थिक अनियमितताओं की पुष्टि की थी। इस शिकायत के आधार पर तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी ने आरके बधान को विस्तृत जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। जांच अधिकारी आरके बधान ने इस रिपोर्ट को पूरा करने में करीब 2 साल का लंबा वक्त लिया। हैरानी की बात यह है कि वर्तमान प्राचार्य विशाल झरिया द्वारा प्रस्तुत आधिकारिक बैंक स्टेटमेंट को जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में भ्रामक करार दे दिया। भोपाल स्तर पर हुई समीक्षा में जांच की दिशा मोड़ने की इस कोशिश को पकड़ लिया गया है। वर्तमान में बरगी नगर स्कूल में पदस्थ किशन रायखेड़े की पुरानी फाइल खुलने से उनकी वर्तमान सेवाओं पर भी संकट आ गया है।

​विभाग के अफसरों ने जतायी नाराजगी

​लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के संचालक केके द्विवेदी ने इस मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा है कि जबलपुर के स्थानीय अधिकारियों का रवैया इसमें निराशाजनक रहा है। जांच रिपोर्ट के सतही होने और तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका के कारण अब विभाग सीधे पुलिस एफआईआर दर्ज कराने की कानूनी तैयारी कर रहा है। वहीं जांच अधिकारी आरके बधान ने स्पष्ट किया है कि रामपुर स्कूल प्रकरण में दोबारा जांच शुरू कर दी गई है। इसके तहत पूर्व प्राचार्य किशन रायखेड़े सहित संबंधित शिक्षकों और भृत्य को नोटिस जारी कर उनका अंतिम जवाब मांगा गया है। विभाग अब विभागीय लीपापोती को दरकिनार कर दोषियों के खिलाफ सख्त आपराधिक मामला दर्ज कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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