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ट्राइबल के शिक्षकों को भी देनी होगी पात्रता परीक्षा, आदेश के बाद विरोध शुरू

 


जबलपुर। जबलपुर सहित मध्य प्रदेश में जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत कार्यरत हजारों शिक्षकों के लिए राज्य सरकार ने योग्यता संबंधी कड़े प्रावधान लागू कर दिए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग की तर्ज पर अब जनजातीय कार्य विभाग में भी शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य कर दिया गया है। इस नए आधिकारिक आदेश के प्रभाव में आने से विभाग के लगभग 65 हजार शिक्षकों को अपनी वर्तमान सेवाओं को सुरक्षित रखने के लिए इस परीक्षा को उत्तीर्ण करना होगा। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार विभाग में कुल 95 हजार शिक्षक विभिन्न श्रेणियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिनमें से 65 हजार शिक्षकों के पास अब तक निर्धारित पात्रता नहीं है। इस निर्णय ने विभाग के भीतर एक बड़े शिक्षक वर्ग के बीच भविष्य की नियुक्तियों और सेवा शर्तों को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।

​सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और वैधानिक प्रावधानों का अनुपालन

​जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त तरुण राठी द्वारा जारी किए गए नवीनतम आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि यह नीतिगत परिवर्तन माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के आधार पर किया गया है। विभाग ने सिविल अपील क्रमांक 1385/2025 तथा 1386/2025 सहित अन्य संबद्ध न्यायिक प्रकरणों में आए निर्णयों को इस व्यवस्था का मुख्य आधार बनाया है। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण कानून शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के प्रावधानों के तहत भी शिक्षकों के लिए न्यूनतम पात्रता परीक्षा पास करना वैधानिक रूप से अनिवार्य है। विभाग का मुख्य उद्देश्य शिक्षा के स्तर में सुधार करना और राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप योग्य शिक्षकों की सेवाएं सुनिश्चित करना है।

​जुलाई और अगस्त 2026 में आयोजित होगी विशेष पात्रता परीक्षा

​विभाग ने पात्रता विहीन शिक्षकों को अपनी योग्यता सिद्ध करने के लिए एक निश्चित समय सीमा प्रदान की है। निर्देशों के अनुसार प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के उन सभी शिक्षकों को 2 वर्ष की निर्धारित अवधि के भीतर यह परीक्षा अनिवार्य रूप से उत्तीर्ण करनी होगी। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विभाग ने जुलाई-अगस्त 2026 में एक विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने की रूपरेखा तैयार कर ली है। यह उन सभी शिक्षकों के लिए एक निर्णायक अवसर होगा जो वर्तमान में निर्धारित शैक्षणिक मापदंडों की श्रेणी में नहीं आते हैं। इस परीक्षा के आयोजन के लिए विभागीय स्तर पर प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियां भी प्रारंभ कर दी गई हैं ताकि समयबद्ध तरीके से लक्ष्य पूरा हो सके।

​जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देश जारी

​आयुक्त तरुण राठी ने प्रदेश के सभी संभागीय उपायुक्तों, सहायक आयुक्तों और जिला संयोजकों को इस संबंध में सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रत्येक जिले के जिम्मेदार अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि उनके क्षेत्र के सभी अपात्र शिक्षक इस प्रक्रिया से अवगत हों और उनकी भागीदारी शत-प्रतिशत सुनिश्चित की जाए। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के पालन में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी संबंधित अधिकारियों को इस पूरी चयन प्रक्रिया की निरंतर निगरानी करने और आदेशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने के लिए पाबंद किया गया है ताकि शिक्षकों की शैक्षणिक गुणवत्ता में कोई कमी न रहे।

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