जबलपुर। बरेला स्थित सांदीपनी स्कूल के कक्षा 10वीं के छात्र शरद विश्वकर्मा का शैक्षणिक भविष्य दांव पर लगने के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। इस प्रकरण में प्रारंभ में एक शिक्षक पर लापरवाही के आरोप लग रहे थे, लेकिन जांच और उपलब्ध दस्तावेजों ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। यह स्पष्ट हुआ है कि छात्र के एडमिट कार्ड में विषय की गड़बड़ी स्कूल स्तर से नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल, भोपाल के स्तर पर हुई तकनीकी त्रुटि का परिणाम है। इस विसंगति के कारण अब छात्र का एक साल बर्बाद होने की कगार पर है, जिसके समाधान के लिए छात्र ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गुहार लगाई है।
समय पर पत्राचार के बावजूद नहीं हुआ सुधार
जांच में यह तथ्य सामने आया है कि परीक्षा फॉर्म भरते समय छात्र के विषयों की प्रविष्टि स्कूल द्वारा सही की गई थी। प्रवेश पत्र में संस्कृत के स्थान पर अंग्रेजी विषय अंकित होने की त्रुटि को स्कूल के परीक्षा प्रभारी मिथिलेश दुबे ने समय रहते पकड़ लिया था। नवंबर और दिसंबर माह में ही स्कूल प्रबंधन द्वारा इस संबंध में सुधार हेतु आवश्यक दस्तावेज और आवेदन भोपाल स्थित बोर्ड कार्यालय भेज दिए गए थे। विभागीय साक्ष्य बताते हैं कि स्कूल की ओर से निरंतर पत्राचार किया गया, लेकिन उच्च स्तर पर इस मानवीय या तकनीकी चूक का निराकरण समय पर नहीं हो सका। इसी कारण छात्र को गलत विषयों वाले प्रवेश पत्र के साथ ही परीक्षा में बैठना पड़ा। शिक्षक ओम प्रकाश तिवारी पर लगाए गए व्यक्तिगत लापरवाही के आरोप अब निराधार साबित हो रहे हैं क्योंकि रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया था।
प्रशासनिक जांच और मुख्यमंत्री को पत्र
अपनी समस्या का समाधान न होता देख छात्र शरद विश्वकर्मा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र भेजकर न्याय की मांग की है। छात्र का कहना है कि विभागीय देरी और तकनीकी खामी की सजा उसे नहीं मिलनी चाहिए। इस पत्र के माध्यम से शैक्षणिक सत्र को शून्य होने से बचाने के लिए शासन के सीधे हस्तक्षेप की अपेक्षा की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जबलपुर कलेक्टर और कमिश्नर ने भी शिक्षा विभाग को सूक्ष्मता से जांच के निर्देश दिए हैं। विभाग अब इस बात का विश्लेषण कर रहा है कि जब स्कूल ने समय पर सूचना दे दी थी, तो बोर्ड कार्यालय से सुधार की प्रक्रिया क्यों बाधित हुई।
हर पहलू से की जा रही जांच
मामले के अन्य पहलुओं पर गौर करें तो यह भी बात निकलकर आई है कि छात्र और उनके अभिभावकों को भी प्रवेश पत्र प्राप्त होने पर विषयों का मिलान करना चाहिए था। हालांकि, स्कूल प्रबंधन ने अपने पक्ष को मजबूती से रखते हुए सभी पत्राचार के रिकॉर्ड वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दिए हैं। इन दस्तावेजों से प्रमाणित होता है कि स्कूल स्तर पर सुधार के हरसंभव प्रयास किए गए थे। फिलहाल शिक्षा विभाग के अधिकारी छात्र का साल बचाने के लिए वैधानिक विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। स्कूल प्रशासन ने भी आश्वासन दिया है कि छात्र के हित में वे हर प्रकार के सहयोग के लिए तत्पर हैं। अब पूरी स्थिति शासन के निर्णय पर टिकी है कि वह इस तकनीकी गड़बड़ी का क्या समाधान निकालता है।
