जबलपुर. भारतीय रेलवे में नियमों को ताक पर रखकर अधिकारियों के आवासों (बंगलों) पर कर्मचारियों से घरेलू काम कराने का एक बड़ा मामला सामने आया है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को भेजी गई एक विस्तृत शिकायत के बाद रेलवे बोर्ड हरकत में आया है और पश्चिम मध्य रेलवे जबलपुर सहित देश के सभी रेल जोनों के महाप्रबंधकों को इस गंभीर शिकायत की जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
शिकायत करने वाले ने खुद को एक जागरूक नागरिक बताया है। शिकायत मिलने के बाद रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक संरक्षा (सिविल) राहुल श्रीवास्तव ने मामले में जांच बैठा दी है। पश्चिम-मध्य रेलवे सहित देश के सभी क्षेत्रीय रेलवे के महाप्रबंधक को शिकायत की प्रति भेजते हुए जांच रिपोर्ट मांगी है। जांच के दौरान कोई मामला पकड़ में आने पर क्या कार्रवाई की गई, इसकी भी जानकारी देने को कहा है।
जांच के आदेश से मचा है हड़कम्प
प्रधानमंत्री कार्यालय को सीपीग्राम्स पोर्टल के माध्यम से शिकायती पत्र भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि रेल हादसों कर्मचारियों की मौतों और सुरक्षा से जुड़ी विफलताओं को लेकर यह पत्र सार्वजनिक हित के उद्देश्य से लिखा जा रहा है। पत्र में कहा गया है कि सेफ्टी (सुरक्षा व संरक्षा) से जुड़े कर्मियों जैसे ट्रैक मेंटेनर, पीडब्ल्यूआई, लाइन पेट्रोलिंग, ऑपरेटिंग और लोको से जुड़े कर्मियों को उनकी मूल सुरक्षा जिम्मेदारियों से हटाकर कार्यालय के काम या अधिकारियों के निजी उपयोग में लगाया जा रहा है। ये कर्मचारी फील्ड की बजाय निजी आवास, घरेलू कार्यों, वाहन संचालन व व्यक्तिगत सहायक में लगे पाए जाते हैं। इस कारण उनका बोझ फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों पर पड़ रहा है।
अधिकारी फुट प्लेट पर नहीं जाते
पत्र में अधिकारियों पर भी आरोप लगाया गया है।लिखा है कि अधिकारी भी फुटप्लेट पर नहीं जाते है। वे स्टाफ को एक फॉर्मेट देकर भरकर लाने को कहते हैं। इससे लाइन पेट्रोलिंग, फुटप्लेट निरीक्षण और फील्ड चेकिंग अक्सर कागजों तक सीमित रहती है।
हादसों की गाज केवल छोटे कर्मचारियों पर
शिकायतकर्ता ने मर्मस्पर्शी सवाल उठाया है कि रेलवे में होने वाले ट्रैक फेल्योर और हादसों के बाद हमेशा निचले स्तर के कर्मचारियों को ही बलि का बकरा क्यों बनाया जाता है? क्या सिस्टम की विफलता की जिम्मेदारी कभी बड़े अधिकारियों पर तय होगी?

