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रेलवे इंजीनियर की मौत के बाद ईडी ने कुर्क की संपत्ति, जबलपुर में हुई थी पहली एफआईआर

 


जबलपुर। प्रवर्तन निदेशालय के भोपाल आंचलिक कार्यालय ने भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के विरुद्ध एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई के अंतर्गत पश्चिमी रेलवे के राजकोट डिवीजन में पदस्थ रहे तत्कालीन संभागीय अभियंता वेद प्रकाश श्रीवास्तव की 1.58 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय की यह कार्रवाई 5 फरवरी 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है। कुर्क की गई संपत्तियों में दो आवासीय फ्लैट और 22 चल संपत्तियां शामिल हैं। इन चल संपत्तियों में मुख्य रूप से सावधि जमा और विभिन्न बैंक खातों में जमा की गई राशि को शामिल किया गया है। सरकारी पद पर रहते हुए अर्जित की गई इस कथित अवैध कमाई के मामले ने अभियंता की मृत्यु के पश्चात भी उनके परिवार की कानूनी कठिनाइयों को बढ़ा दिया है।

​जबलपुर सीबीआई की चार्जशीट के आधार पर शुरू हुई कानूनी प्रक्रिया

​इस पूरे प्रकरण की वैधानिक शुरुआत सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा जबलपुर द्वारा दर्ज की गई एक प्राथमिकी से हुई थी। सीबीआई ने तत्कालीन सरकारी अधिकारी वेद प्रकाश श्रीवास्तव और उनकी पत्नी विभा श्रीवास्तव के विरुद्ध सरकारी पद का दुरुपयोग कर आय से अधिक संपत्ति जुटाने का गंभीर आरोप लगाया था। जांच एजेंसी ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 109 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(2) के अंतर्गत प्रकरण पंजीबद्ध किया था। गहन जांच के उपरांत सीबीआई ने 22 मई 2023 को जबलपुर स्थित विशेष सीबीआई न्यायालय में अपनी अंतिम रिपोर्ट और चार्जशीट संख्या 02/2023 दाखिल की थी। सीबीआई के आधिकारिक आकलन के अनुसार अपराध के माध्यम से अर्जित की गई कुल संपत्ति की राशि लगभग 1.66 करोड़ रुपये आंकी गई थी। इसी आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच शुरू की थी।

​अवैध धन को निवेश में बदलने का हुआ खुलासा

​प्रवर्तन निदेशालय की तफ्तीश में यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि भ्रष्टाचार के माध्यम से प्राप्त नकद राशि को प्रारंभ में बैंकिंग प्रणाली से जानबूझकर दूर रखा गया था। इस धन का उपयोग परिवार के दैनिक खर्चों को पूरा करने में गुप्त रूप से किया जाता रहा। बाद में इस काली कमाई को बैंकिंग चैनल में लाने के उद्देश्य से इसे परिवार के सदस्यों के विभिन्न बैंक खातों में जमा कराया गया ताकि लेन-देन की कड़ियों को उलझाया जा सके। जांच में यह भी पाया गया कि खातों में जमा इस राशि को बाद में सावधि जमा योजनाओं और अन्य सुरक्षित वित्तीय निवेशों में परिवर्तित कर दिया गया। इसी धन का उपयोग दो आवासीय फ्लैटों के क्रय में भी किया गया था। प्रवर्तन निदेशालय ने साक्ष्यों के आधार पर इन संपत्तियों को अनुपातहीन आय से जुड़ा हुआ मानते हुए इन्हें कुर्क करने का निर्णय लिया है।

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