होटल व्यवसायी चंडोक बंधुओं पर जीएसटी का छापा: 40 लाख की कर अदायगी और करोड़ों के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा
जबलपुर। शहर के प्रतिष्ठित होटल व्यवसायियों और मशीनरी फर्मों पर सेंट्रल जीएसटी की एंटी-इवेजन टीम द्वारा की गई छापेमारी ने व्यापारिक जगत में हड़कंप मचा दिया है। शनिवार से शुरू हुई इस कार्रवाई ने उस वक्त नया मोड़ ले लिया जब जांच के शुरुआती घंटों के भीतर ही संबंधित व्यवसायियों ने बड़ी राशि टैक्स के रूप में जमा कर दी। सूत्रों के अनुसार, चंडोक बंधुओं ने विभाग के दबाव और साक्ष्यों के सामने आते ही लगभग 40 लाख रुपये का टैक्स सरेंडर किया है। हालांकि, विभाग ने अभी तक इस राशि की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन इसे जांच के दौरान की गई 'आंशिक कर-अदायगी' के रूप में देखा जा रहा है।
कई ठिकानों पर एक साथ दबिश
सेंट्रल जीएसटी की टीम ने पूरी योजना के साथ शनिवार को शहर के विभिन्न हिस्सों में छापेमारी शुरू की। जांच की जद में मुख्य रूप से चंडोक मशीनरीज और शान अलीजे होटल के संचालक नितिन चंडोक और राजेश चंडोक आए हैं। विभागीय टीमों ने तिलवारा रोड स्थित होटल शान अलीजे, अधारताल इंडस्ट्रियल स्टेट स्थित फैक्ट्री, करमचंद चौक के समीप स्थित मुख्य कार्यालय और सिविल लाइन्स क्षेत्र में स्थित व्यवसायियों के दस्तावेजों की सघन जांच की। यह कार्रवाई देर रात तक चलती रही, जिससे पूरे शहर के व्यापारिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।
इवेंट बिलिंग और कैश ट्रांजेक्शन के जरिए टैक्स चोरी का संदेह
जांच एजेंसी को इस छापेमारी के दौरान कई ऐसे इनपुट मिले हैं, जो बड़े स्तर पर जीएसटी की चोरी की ओर इशारा करते हैं। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, तिलवारा रोड स्थित होटल शान अलीजे में बड़े पैमाने पर शादियां और अन्य भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विभाग को संदेह है कि इन आयोजनों की आधिकारिक बिलिंग में भारी हेरफेर की गई है। बताया जा रहा है कि बिलिंग का एक बड़ा हिस्सा आधिकारिक दस्तावेजों में कम दिखाया जाता था, जबकि शेष राशि का भुगतान नकद में लिया जाता था। इस मॉडल के जरिए सरकार को मिलने वाले राजस्व को भारी चपत लगाने की आशंका जताई जा रही है। जांच एजेंसी अब इस 'कैश मॉडल' की बारीकी से पड़ताल कर रही है।
भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेज जब्त
छापेमारी के दौरान जीएसटी टीम ने केवल कागजी दस्तावेजों तक ही अपनी जांच सीमित नहीं रखी। अधिकारियों ने संबंधित फर्मों के कार्यालयों से कंप्यूटर हार्ड डिस्क, बिल-बुक, जीएसटी रिटर्न की फाइलें, ई-वे बिल और बैंक लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए हैं। इन डिजिटल रिकॉर्ड्स और हार्ड डिस्क्स का मिलान अब बैंक स्टेटमेंट और वास्तविक व्यापारिक गतिविधियों से किया जा रहा है। जांच टीम ने कई जगहों पर अलमारियों और दस्तावेजों को सील कर सुरक्षित कर दिया है, ताकि साक्ष्यों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न की जा सके। आने वाले दिनों में इन दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच होने की भी संभावना है।
-विभाग की आधिकारिक चुप्पी बरकरार
इस पूरी कार्रवाई को लेकर सेंट्रल जीएसटी विभाग के आला अधिकारियों ने फिलहाल आधिकारिक चुप्पी साध रखी है। विभाग का कहना है कि अभी जांच प्रक्रियाधीन है और जब्त किए गए डिजिटल रिकॉर्ड्स का विश्लेषण किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, वास्तविक कर देनदारी और अनियमितताओं की स्पष्ट तस्वीर डेटा के पूर्ण मिलान के बाद ही सामने आएगी। शहर के व्यापारिक संगठनों की नजरें भी इस कार्रवाई पर टिकी हैं, क्योंकि इसे हाल के समय की सबसे बड़ी जांच माना जा रहा है। विभागीय सूत्रों का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, टैक्स चोरी के और भी बड़े आंकड़े सामने आ सकते हैं और कुछ अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी इसकी जद में आ सकते हैं।
