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जबलपुर:शिक्षा विभाग में एक करोड़ से अधिक का गबन, 14 लोगों पर एफआईआर दर्ज



अधिकारियों ने अपनों को बनाया वेंडर और फर्जी बिलों के माध्यम से निकाली सरकारी राशि

जबलपुर। पनागर विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में वित्तीय अनियमितताओं का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। यहां पदस्थ जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों ने आपसी सांठगांठ के जरिए शासन की राशि का बड़ा गबन किया। पुलिस जांच के दौरान यह पाया गया कि करीब 1 करोड़ रुपये से अधिक की राशि फर्जी बिलों के माध्यम से निकाली गई। इस पूरे षड्यंत्र का खुलासा होने के बाद पनागर थाने में 14 आरोपियों के विरुद्ध धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।सहायक संचालक सोनम कटारे की शिकायत पर पुलिस ने यह कार्रवाई की है। उन्होंने पुलिस को सौंपे प्रतिवेदन में बताया कि वर्ष 2018-19 से लेकर 2024-25 के बीच कार्यालय में व्यापक स्तर पर आर्थिक हेरफेर किया गया। आरोपियों ने उन कार्यों के बिल भुगतान के लिए प्रस्तुत किए जो धरातल पर कभी संपादित ही नहीं हुए थे। इसके अलावा शासकीय कर्मचारियों के लंबित एरियर और अन्य बकाया भुगतान की राशि को भी गलत तरीके से आहरित कर लिया गया। इस गबन को छिपाने के लिए दस्तावेजों में भी हेराफेरी की गई थी।

फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए अपनाई गई विशेष कार्यप्रणाली

​इस घोटाले को अंजाम देने के लिए विभाग के ही कर्मचारियों ने अपने रिश्तेदारों और परिचितों को फर्जी वेंडर के रूप में नामांकित किया। जांच में पाया गया कि सहायक ग्रेड विजय कुमार भलावी ने अपने परिवार के सदस्यों का उपयोग सरकारी धन को ठिकाने लगाने के लिए किया। इसमें विजय की पत्नी जयंती भलावी और उनकी तीन बेटियों माधुरी भलावी, रागिनी भलावी तथा रानू भलावी के बैंक खातों का उपयोग किया गया। इनके अतिरिक्त समीर कोष्ठा, माला कोष्ठा, अंकुश नेमा और पूर्व अतिथि शिक्षक सुचित्रा पटेल के खातों में भी फर्जी तरीके से राशि स्थानांतरित की गई। इन सभी बाहरी लोगों को वेंडर दर्शाकर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की गई थी।

पुलिस जांच के घेरे में आए पूर्व शिक्षा अधिकारी और अन्य कर्मचारी

​पुलिस ने सहायक संचालक द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों की गहन जांच के उपरांत जिन 14 लोगों को आरोपी बनाया है उनमें शिक्षा विभाग के कई वरिष्ठ पदस्थ लोग शामिल हैं। आरोपियों की सूची में पूर्व शिक्षा अधिकारी शैलबाला डोंगरे और सेवानिवृत्त पूर्व शिक्षा अधिकारी त्रयंबक गणेश खरे का नाम मुख्य रूप से शामिल है। इनके साथ ही सेवानिवृत्त लेखापाल नरेन्द्र कुमार तिवारी, सहायक ग्रेड विजय कुमार भलावी, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के सेवानिवृत्त उच्च श्रेणी शिक्षक गणेश प्रसाद शुक्ला और सहायक ग्रेड दो अनिल कुमार के नाम भी एफआईआर में दर्ज किए गए हैं। पुलिस की जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि इन सभी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए शासन को बड़ी आर्थिक क्षति पहुंचाई है। विभाग की आंतरिक जांच और पुलिस की पड़ताल के बाद अब सभी आरोपियों पर कानूनी शिकंजा कस दिया गया है। मामले की आगे की विवेचना जारी है जिसमें अन्य वित्तीय ट्रांजेक्शन की भी जांच की जा रही है।

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