जबलपुर। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अंतर्गत जबलपुर सिटी सर्किल के दक्षिण संभाग में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। शाहनाला तिलवारा रोड पर शाम को विद्युत लाइन विस्तार का कार्य करते समय करंट की चपेट में आने से एक आउटसोर्स कर्मी की जान चली गई। इस घटना के बाद विद्युत कर्मचारी संघ ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए मृतक के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता की मांग उठाई है।
पोल पर कार्य के दौरान हुआ हादसा
विद्युत वितरण कंपनी के दक्षिण संभाग में शाहनाला तिलवारा रोड पर शैलू ठेकेदार के माध्यम से नई विद्युत लाइन खींचने का कार्य किया जा रहा था। इस कार्य में तैनात 40 वर्षीय आउटसोर्स कर्मी मुकेश मरावी पोल पर चढ़कर लाइन बिछाने का प्रयास कर रहा था। कार्य के दौरान अचानक 11 केवी की लाइन में करंट प्रवाहित होने लगा जिसकी चपेट में मुकेश आ गया। करंट का झटका इतना तेज था कि वह पोल पर लगे झूला के सहारे वहीं फंसकर लटक गया। नीचे मौजूद अन्य कर्मचारियों ने तत्काल स्थिति को संभालने का प्रयास किया और आनन-फानन में जेसीबी मशीन मंगवाई गई। जेसीबी की मदद से मुकेश को पोल से नीचे उतारकर तुरंत मेडिकल अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहां चिकित्सकों ने परीक्षण के उपरांत उसे मृत घोषित कर दिया।
सुरक्षा परमिट और लापरवाही के सवाल
इस घटना ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्य प्रदेश बाह्य स्रोत कर्मचारी संघ के प्रांतीय महासचिव हरेंद्र श्रीवास्तव ने इस मामले में गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि जब ठेकेदार द्वारा 11 केवी लाइन पर कार्य करने के लिए बाकायदा विभाग से परमिट लिया गया था तो फिर अचानक बिजली की सप्लाई कैसे शुरू हो गई। यह सीधे तौर पर तकनीकी लापरवाही या समन्वय की कमी का मामला नजर आता है। संघ का कहना है कि परमिट लेने के बावजूद लाइन चार्ज होना एक बड़ी चूक है जिसकी वजह से एक श्रमिक को अपनी जान गंवानी पड़ी।
मामले की जांच और कार्रवाई की मांग
घटना के विरोध में संघ के पदाधिकारियों ने एकजुट होकर निष्पक्ष जांच की आवाज उठाई है। संघ के प्रमुख सदस्यों में केएन लोखंडे, एसके मौर्य, शशि उपाध्याय, ख्यालीराम, महेश दुबे, राम शंकर, मोहन दुबे, मदन पटेल, लाखन सिंह राजपूत, किशोर और टी डेविड शामिल हैं। इन सभी पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से मानवाधिकार आयोग से इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। संघ की मांग है कि घटना की उच्च स्तरीय जांच की जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सुरक्षा में चूक किस स्तर पर हुई थी। दोषी अधिकारियों या सुपरवाइजर के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाही करने की बात भी कही गई है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
परिजनों हेतु आर्थिक सहायता की अपील
श्रमिक की मृत्यु के बाद उसके परिवार के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। मुकेश मरावी अपने पीछे पत्नी और बच्चों को छोड़ गया है जिनके भविष्य को लेकर संघ चिंतित है। कर्मचारी संगठन ने मांग रखी है कि संबंधित ठेकेदार द्वारा मृतक के आश्रितों को 20 लाख रुपये की सहायता राशि तुरंत प्रदान की जाए। इसके साथ ही विभाग से भी अनुकंपा और अन्य देय लाभों को शीघ्र दिलाने की अपेक्षा की गई है। संघ का कहना है कि जब तक श्रमिक के परिवार को उचित न्याय और मुआवजा नहीं मिल जाता तब तक वे इस विषय को प्रमुखता से उठाते रहेंगे।
