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जुनून की जीत: प्रोग्रामिंग के शौक ने जबलपुर की बेटी ऐश्वर्या को दिलाया राष्ट्रीय अवॉर्ड


इंडिया स्किल रीजनल कॉम्पिटिशन में जीता 'मैडेलियन फॉर एक्सिलेंस' अवॉर्ड,
महिला पॉलिटेक्निक की छात्रा ऐश्वर्या विश्वकर्मा ने बढ़ाया जिले का गौरव


जबलपुर। संस्कारधानी की होनहार बेटी और शासकीय महिला पॉलिटेक्निक महाविद्यालय की छात्रा ऐश्वर्या विश्वकर्मा ने राष्ट्रीय स्तर पर जिले और प्रदेश का मान बढ़ाया है। केंद्र सरकार के कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय द्वारा गुजरात के गांधीनगर में 15 से 18 फरवरी तक आयोजित 'इंडिया स्किल रीजनल कॉम्पिटिशन (वेस्टर्न रीजन)' में ऐश्वर्या ने अपनी तकनीकी दक्षता का लोहा मनवाते हुए ‘मैडेलियन फॉर एक्सिलेंस’ अवॉर्ड हासिल किया है। कंप्यूटर साइंस की छात्रा ऐश्वर्या ने इस प्रतियोगिता में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया था। ऐश्वर्या ने प्रतियोगिता के दौरान डेटाबेस कनेक्टिविटी के साथ विभिन्न जटिल वेब एप्लिकेशन तैयार किए, जिन्हें विशेषज्ञों द्वारा काफी सराहा गया। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके महाविद्यालय, बल्कि पूरे जबलपुर जिले को गौरवान्वित किया है।

जिला स्तर से स्वर्ण पदक तक का सफर


ऐश्वर्या की यह सफलता अचानक नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे कड़ी मेहनत और निरंतरता रही है। उनकी इस यात्रा की शुरुआत जिला स्तरीय प्रतियोगिता से हुई थी। वहां अपनी प्रतिभा दिखाने के बाद, उन्हें भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर मिला। राज्य स्तर पर उन्हें "स्मार्ट सिटी" विषय पर एक निर्धारित समय सीमा के भीतर एप्लिकेशन डिजाइन और विकसित करने का चुनौतीपूर्ण कार्य दिया गया था। ऐश्वर्या ने एक ऐसी प्रभावी वेब एप्लिकेशन तैयार की, जिसमें स्थानीय पर्यटन स्थलों, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों की जानकारी को सुव्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत किया गया था। उनके इस नवाचार और तकनीकी सटीकता के लिए उन्हें राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक से नवाजा गया, जिसके बाद उन्हें क्षेत्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने का गौरव प्राप्त हुआ।

जुनून ने बदला करियर का रास्ता

​न्यू रामनगर आधारताल निवासी आशुतोष विश्वकर्मा एवं श्रीमती भारती विश्वकर्मा की सुपुत्री ऐश्वर्या की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने जुनून का पीछा करना चाहते हैं। स्कूली शिक्षा वाणिज्य संकाय से पूर्ण करने के बावजूद, प्रोग्रामिंग के प्रति ऐश्वर्या की रुचि कक्षा नौवीं से ही अटूट थी। अपने इसी जुनून को पूरा करने के लिए उन्होंने पॉलिटेक्निक में कंप्यूटर साइंस को चुना, जो उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।ऐश्वर्या का कहना है कि यह प्रतियोगिता केवल कोडिंग का मुकाबला नहीं थी, बल्कि यह उनके धैर्य और मानसिक दृढ़ता की परीक्षा थी। भविष्य में उनका लक्ष्य ऐसे सॉफ्टवेयर समाधान विकसित करना है, जो देश की वास्तविक समस्याओं का समाधान कर सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।


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