रेलवे में नौकरी लगाने के नाम पर छिंदवाड़ा की युवती से ठगी, कोटा डीआरएम आफिस में एक्जाम, ट्रेनिंग कराई, जबलपुर से जुड़े तार

कोटा/जबलपुर। पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा रेल मंडल के डीआरएम ऑफिस में फर्जी तरीके से एमपी के छिंदवाड़ा की युवती परीक्षा और ट्रेनिंग कराकर नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का कोटा जीआरपी ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने एक साल की मशक्कत के बाद दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि मास्टरमाइंड समेत दो अन्य की तलाश जारी है। वहीं युवती को भेजे कॉल लेटर में पमरे मुख्यालय जबलपुर के कार्मिक विभाग के एक अधिकारी के हस्ताक्षर की भी जांच की जा रही है.

ऐसे चला ठगी का खेल

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा निवासी आरती मोखेडे ने पिछले साल (2025) मार्च में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसे रेलवे में नौकरी का झांसा देकर कोटा बुलाया गया। ठगों ने उसे  डीआरएम ऑफिस के एक कमरे में बैठाकर उसकी बाकायदा परीक्षा ली गई। यही नहीं रेलवे अस्पताल ले जाकर उसका ब्लड सैंपल लिया गया और मेडिकल प्रक्रिया पूरी की गई।

डीआरएम आफिस में 7 दिनों तक कराई फर्जी ट्रेनिंग

इस घटना की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उसे 7 दिनों तक डीआरएम ऑफिस में ट्रेनिंग भी दी गई। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान नौकरी पक्की होने के नाम पर उससे 2.5 लाख रुपये ऐंठ लिए गए।

गिरफ्तार आरोपी और फरार मास्टरमाइंड

जीआरपी उपाधीक्षक शकील अहमद के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शामिल हैं- अनुपम चौधरी: बिहार का निवासी, जो वर्तमान में दिल्ली में रह रहा था। वहीं कौशल शर्मा कोटा का स्थानीय निवासी है. दोनों आरोपियों को कोर्ट ने जेल भेज दिया है। पुलिस की एक टीम मास्टरमाइंड की तलाश में बिहार रवाना की गई है। माना जा रहा है कि मास्टरमाइंड के पकड़े जाने पर कई बड़े रेल अधिकारियों या कर्मचारियों की संलिप्तता का खुलासा हो सकता है।

अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर की जांच

आरती को मिले कॉल लेटर पर पश्चिम मध्य रेलवे जबलपुर मुख्यालय के एक बड़े अधिकारी के हस्ताक्षर मिले हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इसी अधिकारी का नाम पहले भी डमी कैंडिडेट के जरिए दो महिलाओं को नौकरी दिलाने के मामले में उछल चुका है। हालांकि, पुलिस अभी इन हस्ताक्षरों के असली या नकली होने की जांच कर रही है।

रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल

इस मामले ने रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है, कहा जा रहा है कि जिस डीआरएम ऑफिस के गेट पर आरपीएफ का पहरा होता है और जो सीसीटीवी कैमरों से लैस है, वहां कोई बाहरी व्यक्ति 7 दिन तक फर्जी ट्रेनिंग कैसे ले सकता है? कार्मिक विभाग की नाक के नीचे यह खेल चलता रहा और किसी को कानो-कान खबर नहीं हुई।


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