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डॉक्टर दंपती की जालसाजी: फर्जी रजिस्ट्री मामले में डॉ. सुमित-प्राची जैन फरार, सब-रजिस्ट्रार पर भी गिरेगी गाज

उसी जमीन पर अब नगर निगम का ऑफिस खुल गया है।

जबलपुर।
शहर की जानी-मानी बुजुर्ग महिला डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव की बेशकीमती जमीन को धोखाधड़ी से अपने नाम कराने के मामले में आरोपी दंत चिकित्सक दंपती, डॉ. सुमित जैन और डॉ. प्राची जैन, फिलहाल पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। मदन महल थाना पुलिस ने इनके खिलाफ जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज कर लिया है और उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।

दान पत्र के जरिए 60 करोड़ की जमीन पर कब्जा

​जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने डॉ. हेमलता श्रीवास्तव की लगभग 25 हजार वर्ग फीट जमीन, जिसकी बाजार दर 60 करोड़ रुपये से अधिक है, उसे धोखे से हड़पने की साजिश रची थी। 12 फरवरी को कथित तौर पर दो अलग-अलग दान पत्र (Gift Deeds) तैयार करवाए गए, जिसके माध्यम से करीब 11 हजार वर्ग फीट जमीन सुमित जैन और उसकी पत्नी प्राची जैन के नाम कर दी गई। प्रशासन की जांच में इन दस्तावेजों को संदिग्ध पाया गया है।

सब-रजिस्ट्रार पर भी गिरेगी गाज

​इस मामले में केवल डॉक्टर दंपती ही नहीं, बल्कि रजिस्ट्री कार्यालय के अधिकारी भी जांच के घेरे में हैं। आरोप है कि डॉ. हेमलता की नाजुक हालत और उनकी इच्छा के विरुद्ध जाकर यह रजिस्ट्री की गई। पुलिस और जिला प्रशासन अब उन सब-रजिस्ट्रार और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रहे हैं जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर इस विवादित रजिस्ट्री को अंजाम दिया। सूत्रों के अनुसार, दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई तय है।

 अस्पताल में भर्ती होने से पहले का विवाद

​डॉ. हेमलता श्रीवास्तव ने मृत्यु से पहले अस्पताल से एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया था कि डॉ. सुमित जैन और उनकी पत्नी ने उन्हें डरा-धमकार और धोखे में रखकर उनकी संपत्ति के कागजों पर हस्ताक्षर करवाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया था कि उन्होंने कभी अपनी स्वेच्छा से जमीन दान नहीं की। इस बयान के बाद जिला प्रशासन और पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और एसडीएम की जांच रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई।

​नगर निगम ने कब्जे में ली जमीन

​एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही डॉ. सुमित जैन और डॉ. प्राची जैन अपने घर से फरार हैं। पुलिस की कई टीमें उनकी गिरफ्तारी के लिए सक्रिय हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपियों के मोबाइल लोकेशन और अन्य संपर्कों के जरिए उनका पता लगाया जा रहा है। इधर, नगर निगम और जिला प्रशासन ने विवादित संपत्ति को अपने कब्जे में लेकर वहां ताला लगा दिया है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि न हो सके।


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