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त्योहार पर अशुद्ध हुआ तिवारी परिवार का धर्म, डोमिनोज ने पनीर की जगह भेजी पैपरोनी


आयोग का तर्क है कि एक ही किचन और बर्तनों के इस्तेमाल से अनजाने में शाकाहारी लोगों के भोजन में मांसाहारी अंश मिलने की संभावना बनी रहती है, जिसे रोकना आवश्यक है।

जबलपुर। विश्व प्रसिद्ध फूड चेन डोमिनोज (जुबिलेंट फूड वर्क्स लिमिटेड) को एक उपभोक्ता की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करना महंगा साबित हुआ। जिला उपभोक्ता आयोग, सतना ने रीवा रोड स्थित डोमिनोज रेस्टोरेंट पर 8 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। आयोग के अध्यक्ष एससी उपाध्याय, सदस्य उमेश गिरि और विद्या पांडेय की पीठ ने आदेश दिया कि यह राशि 9 प्रतिशत ब्याज के साथ एक माह के भीतर जमा करनी होगी। इसके अलावा, परिवादी दंपति को 10 हजार रुपए कानूनी खर्च के रूप में भी देने होंगे।

धार्मिक भावनाओं को पहुंची ठेस

​मामला 31 अक्टूबर 2024, दीपावली के दिन का है। सतना निवासी सूरज तिवारी और उनकी पत्नी नैंसी तिवारी ने डोमिनोज से 'कोरियन पनीर टिक्का गार्लिक ब्रेड' ऑर्डर किया था। पूरा परिवार आजीवन शाकाहारी है और उस दिन घर में दीपावली के धार्मिक अनुष्ठान चल रहे थे। भोजन के दौरान जब सूरज को स्वाद में कुछ अंतर लगा, तो उन्होंने बारीकी से जांच की। जांच करने पर गार्लिक ब्रेड के भीतर मांस के टुकड़े मिले, जिससे पूरे परिवार की धार्मिक मान्यताएं आहत हुईं और वे सदमे में आ गए।

जांच में हुई मांस की पुष्टि, आयोग ने कंपनी की दलीलों को नकारा

​शिकायत के बाद रेस्टोरेंट से संतोषजनक जवाब न मिलने पर पीड़ित पक्ष ने अधिवक्ता करुणेश अरोरा के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा और फिर उपभोक्ता आयोग में मामला दर्ज कराया। हालांकि, कंपनी ने दलील दी कि शिकायतकर्ता द्वारा पेश की गई तस्वीरें धुंधली हैं और उनकी पैकिंग व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित है। लेकिन खाद्य पदार्थ की लैब जांच में यह स्पष्ट हो गया कि ऑर्डर में पनीर की जगह 'पैपरोनी' (मांस) भेजी गई थी। आयोग ने इसे 'अनुचित व्यापार प्रथा' मानते हुए कंपनी को दोषी करार दिया।

अब शाकाहारी और मांसाहारी के लिए किचन होंगे अलग

​इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए आयोग ने भविष्य के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि जिन रेस्टोरेंट्स में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के भोजन बनते हैं, वहां दो अलग-अलग रसोई घर (किचन) होने अनिवार्य हैं। इसके साथ ही, दोनों विभागों के कर्मचारी और ऑर्डर लेने की व्यवस्था भी अलग होनी चाहिए। आयोग का तर्क है कि एक ही किचन और बर्तनों के इस्तेमाल से अनजाने में शाकाहारी लोगों के भोजन में मांसाहारी अंश मिलने की संभावना बनी रहती है, जिसे रोकना आवश्यक है।

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