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अजब-गजब: बिल जमा किया तो वापस आया, दोबारा किया तो पेनल्टी लग गई!


बिजली कम्पनी की कार्यप्रणाली पर सवाल, मियाद खत्म होने के पहले सॉफ्टवेयर वसूल रहा जुर्माना, उपभोक्ता की सुनवाई नहीं

जबलपुर। मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। शासन की मंशा के अनुरूप डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा दे रहे जागरूक उपभोक्ताओं को विभाग के लचर सॉफ्टवेयर और अधिकारियों की उदासीनता के कारण आर्थिक चपत लग रही है। ताज़ा मामले में एक उपभोक्ता को समय सीमा समाप्त होने से पहले ही विभाग ने तकनीकी गड़बड़ी के नाम पर एक हजार रुपये से अधिक की पेनल्टी लगा दी। यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है, क्योंकि अधिकारी समाधान देने के बजाय तकनीकी खराबी का बहाना बनाकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।

-​समय रहते भुगतान, फिर भी धोखा हुआ

​पूरा मामला एनएके प्रायवेट लिमिटेड से जुड़ा है। कम्पनी के खजरी खिरिया स्थित बिजली कनेक्शन का मासिक बिल 92,825 रुपये आया था। डिजिटल भुगतान के प्रति जागरूकता दिखाते हुए कम्पनी ने बिल जमा करने की अंतिम तिथि 20 फरवरी से एक दिन पहले, यानी 19 फरवरी को ही पूरी राशि ऑनलाइन जमा कर दी। लेकिन  सिस्टम ने इस भुगतान को स्वीकार नहीं किया और तकनीकी कारणों से राशि उपभोक्ता के खाते में 22 फरवरी को वापस (रिफंड) आ गई। यहाँ सवाल यह उठता है कि जब उपभोक्ता ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए समय पर भुगतान किया, तो विभाग का पोर्टल उसे स्वीकार करने में विफल क्यों रहा?

-​डेडलाइन से पहले पेनल्टी: उपभोक्ता को ठगने का नया तरीका

​हैरानी की बात है कि 23 फरवरी को कम्पनी ने पुनः ऑनलाइन बिल भरने का प्रयास किया। इस बार पोर्टल ने बिना किसी वैध कारण के बिल की मूल राशि पर 1,152 रुपये की पेनल्टी जोड़ दी। इस प्रकार बिल की कुल राशि 93,978 रुपये हो गई। नियमतः उपभोक्ता आखिरी तारीख के पहले बिल जमा कर चुका था इसलिए ना रिफंड आना था और ना ही  पेनल्टी लगनी थी। लेकिन विभाग के सॉफ्टवेयर ने समय से पहले ही पेनल्टी थोप दी। एक बार भुगतान की कोशिश कर चुके उपभोक्ता को विभाग की आंतरिक गड़बड़ी के कारण अतिरिक्त राशि देने पर मजबूर करना सीधे तौर पर उपभोक्ता के शोषण की श्रेणी में आता है।

-​तकनीकी खराबी के नाम पर जवाबदेही से बच रहे जिम्मेदार

​इस विसंगति को लेकर जब पीड़ित उपभोक्ता ने पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यालयों में दस्तक दी, तो वहां का रवैया किसी भी जागरूक नागरिक को निराश करने वाला था। अधिकारियों ने दबी जुबान में स्वीकार किया कि यह तकनीकी खराबी है, लेकिन जब बात अतिरिक्त वसूली गई राशि को वापस करने या पेनल्टी हटाने की आई, तो सभी ने चुप्पी साध ली। विभाग के पास इस बात का कोई तार्किक जवाब नहीं है कि यदि तकनीकी खराबी का दंड उपभोक्ता क्यों भरे? अधिकारियों का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया दर्शाता है कि विभाग को उपभोक्ताओं की समस्याओं से ज्यादा अपनी वसूली की फिक्र है।

-​विभाग की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए गंभीर सवाल

​यह घटना केवल एक उपभोक्ता की नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था की विफलता है जो डिजिटल इंडिया के नाम पर जनता से भारी-भरकम बिजली बिल तो वसूल रही है, लेकिन पारदर्शी सिस्टम देने में नाकाम है। एक तरफ बिजली कंपनी घाटे का रोना रोती है, वहीं दूसरी तरफ इस तरह की तकनीकी लूट से आम आदमी का भरोसा सरकारी तंत्र से उठ रहा है। जानकारों का कहना है कि आखिरी तारीख शेष होने के बावजूद पेनल्टी लगना सॉफ्टवेयर की प्रोग्राम्ड लूट हो सकती है। फिलहाल, कम्पनी के संचालक न केवल आर्थिक बल्कि मानसिक परेशानी से भी गुजर रहे हैं, और विभागीय अधिकारी अपनी  नींद से जागने को तैयार नहीं हैं।

ये है कम्पनी का पक्ष

इस प्रकरण में उपभोक्ता द्वारा 19 फरवरी को बिल डेस्क के माध्यम से किया गया बिल भुगतान बिजली कम्पनी के खाते में नहीं पहुंचा। उपभोक्ता के बैंक ने राशि उपभोक्ता के खाते में वापिस भेज दी। लेकिन, जब पुनः भुगतान किया गया तो अंतिम तारीख समाप्त हो चुकी थी,लिहाजा पैनाल्टी ली गई। इसमें कम्पनी की ओर से कोई भी त्रुटि नहीं की गई है। उपभोक्ता को बैंक से जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।

घनश्याम पांडे, जनसम्पर्क अधिकारी, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी

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