मदन महल पुलिस की बढ़ी मुश्किलें: गांजा केस की जांच अब सीधे आईजी की निगरानी में, हाईकोर्ट सख्त


जबलपुर।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मदन महल थाना पुलिस द्वारा एक युवती को गांजा तस्करी के मामले में कथित रूप से फंसाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस संदीप एन भट्ट की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जबलपुर आईजी (पुलिस महानिरीक्षक) को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि जबलपुर निवासी एक युवती को मदन महल पुलिस ने बीती 11 जनवरी 2026 को लिंक रोड से सवा 12 किलो गांजे के साथ गिरफ्तार दिखाया था। युवती ने कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया है कि जब वह रायपुर से जबलपुर आ रही थी, तब ट्रेन के सफर के दौरान मदन महल थाने के एक पुलिस अधिकारी ने उससे अभद्रता की थी। विरोध करने पर पुलिस उसे जबरन थाने ले गई और उसके खिलाफ फर्जी मामला दर्ज कर दिया।

सरकार की 4 सप्ताह की मांग ठुकराई

​मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूर्व में आईजी को जांच के निर्देश दिए थे। शुक्रवार को हुई सुनवाई में सरकार की ओर से जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए 4 सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा गया। इस पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि हमें पुलिस के बहाने नहीं, बल्कि सच्चाई का पता लगाने वाली रिपोर्ट चाहिए। कोर्ट ने समय बढ़ाने की मांग को नामंजूर करते हुए अगली सुनवाई तक का ही समय दिया है।

आईजी को निष्पक्ष जांच करने के निर्देश

​जस्टिस संदीप एन. भट्ट की बेंच ने अपेक्षा की है कि आईजी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए बिना किसी भेदभाव के रिपोर्ट पेश करें। हालांकि, अदालत ने फिलहाल युवती को जमानत देने से इनकार कर दिया है, लेकिन पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मामले की तह तक जाने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी, जिसमें आईजी को सीलबंद लिफाफे में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

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