जबलपुर। जबलपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने भूखंड आवंटन के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। प्राधिकरण ने लंबे समय से बकाया राशि जमा न करने वाले तीन बड़े हितग्राहियों पर गाज गिराते हुए उनके भूखंडों का आवंटन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। जेडीए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दीपक वैद्य के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई के तहत न केवल आवंटन रद्द किया गया है, बल्कि इन भूखंडों के लिए जमा की गई अमानत राशि को भी राजसात कर लिया गया है। प्राधिकरण की संपत्ति अधिकारी रीति सोनवे ने बताया कि समीक्षा बैठक के दौरान यह मामला सामने आया था। जांच में पाया गया कि कई बार नोटिस दिए जाने के बावजूद कुछ आवंटियों ने निर्धारित समय सीमा के भीतर भूखंड की शेष राशि प्राधिकरण के कोष में जमा नहीं कराई थी।
-किस पर क्यों की गई कार्रवाई
-प्रतिपाल सिंह सौंधी: इन्हें योजना क्रमांक-11 के अंतर्गत भूखंड क्रमांक 56 आवंटित किया गया था।
-राजेश गोस्वामी: इन्हें योजना क्रमांक-5/14 के अंतर्गत भूखंड क्रमांक जे-13 आवंटित किया गया था।
-जय राजावत (डायरेक्टर, जय रियल स्टेट): इन्हें योजना क्रमांक-5/14 के अंतर्गत भूखंड क्रमांक जे-14 आवंटित किया गया था। ये तीनों उच्चतम ऑफरकर्ता होने के कारण इस भूखंड के पात्र बने थे, लेकिन भुगतान में देरी के कारण अब उनका अधिकार खत्म कर दिया गया है। प्राधिकरण अब इन तीनों भूखंडों को पुन: विज्ञापन के माध्यम से नए ऑफर आमंत्रित कर विक्रय की प्रक्रिया शुरू करेगा।
-आवंटन के बाद कालाबाजारी: जांच में खुलासा
इस कार्रवाई के दौरान जेडीए सीईओ दीपक वैद्य ने एक गंभीर समस्या की ओर इशारा किया। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण के संज्ञान में यह आया है कि कुछ लोग एक सुनियोजित तरीके से आवंटन की प्रक्रिया में शामिल होते हैं। ये व्यक्ति जेडीए से भूखंड आवंटित तो करा लेते हैं, लेकिन उसकी राशि समय पर जमा नहीं करते। जेडीए अधिकारियों के अनुसार, ऐसे लोग आवंटन पत्र के आधार पर बाजार में अन्य व्यक्तियों या निवेशकों की तलाश करते हैं। राशि जमा करने की अवधि के दौरान वे इन भूखंडों का सौदा बाहरी लोगों से ऊंचे दामों पर कर लेते हैं। इस प्रक्रिया में वास्तविक जरूरतमंद और पात्र हितग्राही भूखंड पाने से वंचित रह जाते हैं, जबकि बिचौलिये और मुनाफाखोर सरकारी संपत्ति का उपयोग कर अनुचित लाभ कमाते हैं। सीईओ ने स्पष्ट किया है कि जेडीए अब ऐसे अस्थायी आवंटियों पर पैनी नजर रख रहा है। भविष्य में भी यदि कोई आवंटी समय पर भुगतान करने में विफल रहता है या आवंटन को व्यवसाय का जरिया बनाता पाया गया, तो उसकी सुरक्षा निधि जब्त कर आवंटन शून्य कर दिया जाएगा।
