जबलपुर। जबलपुर सहित मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इस साल भी कक्षा पहली और दूसरी के विद्यार्थियों को पारंपरिक वार्षिक परीक्षा नहीं देनी होगी। राज्य शिक्षा केंद्र ने स्पष्ट किया है कि छोटे बच्चों को परीक्षा के मानसिक दबाव से मुक्त रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है। इन विद्यार्थियों का मूल्यांकन सतत एवं समग्र आकलन पद्धति और उनकी दक्षता के आधार पर किया जाएगा। इसका उद्देश्य रटने के बजाय बच्चों के सीखने के स्तर और उनके कौशल विकास को परखना है।
9 मार्च से शुरू होंगी अन्य परीक्षाएं
कक्षा तीसरी, चौथी, छठवीं और सातवीं की वार्षिक परीक्षाओं का शेड्यूल जारी कर दिया गया है। ये परीक्षाएं 9 मार्च से 14 मार्च तक आयोजित की जाएंगी, जिनका समय सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक निर्धारित है। साथ ही, राज्य शिक्षा केंद्र ने भाषा विषयों के चयन को लेकर कड़े नियम बनाए हैं। यदि विद्यार्थी हिंदी, उर्दू या मराठी चुनता है, तो द्वितीय भाषा के रूप में अंग्रेजी लेना अनिवार्य होगा। यदि प्रथम भाषा अंग्रेजी है, तो द्वितीय भाषा हिंदी अनिवार्य होगी व उर्दू या मराठी को प्रथम भाषा के रूप में चुनने वाले छात्रों को तीसरी भाषा के रूप में हिंदी पढ़ना आवश्यक होगा
