मैहर। एमपी के रीवा स्थित आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) मैहर में आदिवासियों की 2.50 करोड़ रुपए मूल्य की 3.500 हेक्टेयर कृषि भूमि अल्ट्राटेक सीमेंट को फर्जी तरीके से बेचने के मामले में तत्कालीन पटवारी अशोक सिंह और 7 बिचौलियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। यह भूमि आदिवासी रामसिंह गोड़ और उनके बेटे राजेंद्र सिंह की थी। जिसे फर्जी वारिसाना और ऋण पुस्तिका तैयार कर बेचा गया। ईओडब्ल्यू ने मामले की जांच शुरू कर दी है।EOW एसपी डॉ अरविंद सिंह ठाकुर ने बताया कि शिकायत के सत्यापन के बाद यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस प्रकरण में संबंधित राजस्व अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है। इस मामले में भदनपुर दक्षिणी पट्टी के तत्कालीन पटवारी अशोक सिंह के साथ शोभा प्रसाद कोल निवासी सलैया बदेरा,बैजनाथ कोल खरौंधी नादन देहात, दीपक लालवानी मैहर, गोपाली उर्फ गोपाल आसवानी सिंधी कैंप मैहर, अज्जू उर्फ अजय सावलानी मैहर, कमला उर्फ प्रदीप सेन बरा मैहर, और रामप्रकाश जायसवाल भदनपुर मैहर को आरोपी बनाया गया है। इनके विरुद्ध आईपीसी की धारा 120 बीए 420 सहित अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
3.5 हेक्टेयर खेती की जमीन का पटवारी ने किया हेरफेर-
प्रकरण के अनुसार मैहर तहसील के भदनपुर दक्षिण पट्टी स्थित आदिवासी रामसिंह गोड़ के कब्जे वाली लगभग 3.500 हेक्टेयर कृषि भूमि वर्ष 2010-11 तक राजस्व अभिलेखों में उनके नाम पर दर्ज थी। आरोप है कि तत्कालीन पटवारी अशोक सिंह ने बिचौलियों के साथ मिलकर वर्ष 2012-13 के राजस्व खसरे में रामसिंह गोड़ के जीवित रहते हुए भी उनके पुत्र राजेंद्र सिंह का नाम बिना किसी सक्षम राजस्व अधिकारी के आदेश के वारिसाना के रूप में दर्ज करा दिया। इसके बादए फर्जी ऋण पुस्तिका तैयार की गई। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने आदिवासियों को लोन दिलाने का झांसा देकर उनकी कृषि भूमि की रजिस्ट्री अल्ट्राटेक सीमेंट के नाम करवा दी।