वन अधिकारी ही काले हिरण के शिकार में थे शामिल, 6 फॉरेस्ट कर्मचारियों को किया निलंबित

 
नर्मदापुरम.
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम संभाग के सिवनी मालवा में काले हिरण के शिकार का मामला सामने आया. जहां इस शिकार में वन विभाग के ही कुछ कर्मचारियों की संलिप्तता पाई गई. जिसके बाद मामले में कुल 6 अधिकारी-कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है. 

वन विभाग के मुताबिक वन कर्मियों ने काले हिरण के शिकार से हुई मौत को प्राकृतिक दर्शाने का प्रयास किया था. कर्मचारियों ने सबूतों को सुरक्षित रखने के बजाय उन्हें नष्ट कर दिया था. मुखबिर की सूचना पर वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी लगी तो कर्मचारियों के सीडीआर डिटेल निकाली गई, जिसमें सभी की संलिप्तता पाई गई.

21 जनवरी की घटना, एक माह बाद कार्रवाई

नर्मदापुरम डीएफओ गौरव शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि यह मामला 21 जनवरी 2026 का है. सिवनी मालवा के पास बासनिया गांव की यह घटना है. शिकारी 2 काले हिरण का शिकार करके लेकर जा रहे थे. तभी गांव वालों को इसकी सूचना लगी तो काले हिरण को जमीन पर ही छोड़ कर भाग गए. घटना के बाद हमारे स्टाफ ने उसकी सही से जांच नहीं की और पूरे तथ्य हमारे सामने प्रस्तुत नहीं किए गए.

सीडीआर रिपोर्ट निकालने पर कर्मचारियों की संलिप्तता

उन्होंने बताया कि मुखबिर की सूचना पर हमारे सामने जिस भी स्टाफ का नाम सामने आ रहा था, उनकी सीडीआर डिटेल निकलवाई. जब स्टाफ से इस मामले में कड़ाई से पूछताछ की गई तो सारी बात सामने आ गई. जहां पता चला कि यह एक शिकार का प्रकरण था. जिसको हमारे स्टाफ के कर्मचारियों द्वारा दबाया जा रहा था और शिकार को प्राकृतिक मौत बताई जा रही थी. जिसमें उनके द्वारा एक हिरण की बात की गई थी, जबकि इसमें दो काले हिरण थे.

इन वन कर्मियों को किया निलंबित

एक हिरण जिंदा था और एक मृत. उसके बाद इन कर्मचारियों को प्रकरण में दोषी पाए गए परिक्षेत्र अधिकारी सिवनी मालवा आशीष रावत, वनपाल महेश गौर, वनरक्षक मनीष गौर, रूपक झा, ब्रजेश पगारे व पवन उइके को निलंबित कर दिया गया. आगे मामले की जांच की जा रही है.

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