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जनगणना 2027: देश का 'दर्पण' बनेगी 16वीं जनगणना, जबलपुर में कर्मचारियों का दो दिवसीय प्रशिक्षण प्रारंभ


जबलपुर।
देश की आर्थिक उन्नति, राष्ट्रीय योजनाओं के सटीक क्रियान्वयन और बेहतर नीति निर्धारण के लिए जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह मात्र नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र की प्रगति का जीवंत दर्पण है। इसी उद्देश्य के साथ जबलपुर नगर निगम द्वारा आजादी के बाद की 8वीं और वर्ष 1872 के बाद की 16वीं जनगणना के लिए विधिवत प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। स्मार्ट सिटी कार्यालय में आयोजित इस दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन नगर निगम आयुक्त एवं मुख्य जनगणना अधिकारी रामप्रकाश अहिरवार की उपस्थिति में हुआ। यह प्रशिक्षण 20 फरवरी 2026 तक संचालित किया जाएगा। इस अवसर पर जनगणना कार्य निदेशालय के संयुक्त निदेशक रामावतार पटेल, जिला प्रभारी मनोज नाथानी और अपर आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने कर्मचारियों को डिजिटल जनगणना की बारीकियों और डेटा संकलन के आधुनिक तरीकों से अवगत कराया।

देश के इतिहास में पहली बार: आम नागरिक को मिला 'स्व-गणना' का अधिकार

​इस बार की जनगणना तकनीकी नवाचार और जन-भागीदारी का एक अनूठा उदाहरण पेश करेगी। निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने बताया कि भारतीय जनगणना के इतिहास में पहली बार आम नागरिकों को 'स्व-गणना' का ऐतिहासिक अवसर प्रदान किया जा रहा है। इसके तहत जनता स्वयं डिजिटल पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकेगी। इससे न केवल आंकड़ों की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी, बल्कि यह डिजिटल इंडिया की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

दो चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया: 16 अप्रैल से शुरू होगा स्व-गणना का पोर्टल

​प्रशिक्षण सत्र में संयुक्त निदेशक रामावतार पटेल ने स्पष्ट किया कि जनगणना का यह महाभियान दो चरणों में संपन्न होगा।

  • प्रथम चरण: 16 से 30 अप्रैल 2026 तक आम जनता पोर्टल पर स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेगी। स्व-गणना के बाद नागरिकों को एक S.E. ID (Self-Enumeration ID) प्राप्त होगी, जिसे उन्हें प्रगणक के घर आने पर साझा करना होगा।
  • द्वितीय चरण: 1 मई से 30 मई 2026 के बीच मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य किया जाएगा। इसके पश्चात, मुख्य जनसंख्या गणना का कार्य फरवरी 2027 में शुरू होगा।

सटीक आंकड़े ही तय करेंगे विकास की दिशा: निगमायुक्त

​निगमायुक्त ने जनगणना को सर्वोच्च प्राथमिकता वाला कार्य बताते हुए कहा कि सही आंकड़े ही सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के लिए प्रभावी नीतियां बनाने में सक्षम बनाते हैं। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने जोर दिया कि डिजिटल टूल्स का उपयोग डेटा संकलन में मानवीय त्रुटियों को कम करेगा। आगामी दशक की समृद्धि और विकास का मार्ग इन्हीं आंकड़ों से प्रशस्त होगा। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में नगर निगम और जिला प्रशासन के कर्मचारियों को डेटा फीडिंग और जमीनी स्तर पर आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए विशेष टिप्स दिए जा रहे हैं।

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