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शेयर मार्केट क्रैश, सेंसेक्स 1100 प्वाइंट के नीचे लुढ़का


नई दिल्ली/जबलपुर।
शेयर मार्केट में मंगलवर को बड़ी गिरावट आई। सुबह एक घंटे में सेंसेक्स में 1100 से ज्यादा लुढ़क गया। निफ्टी 50 ने भी 280 अंकों से ज्यादा का गोता लगाया।  मंगलवार को निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स दोनों ही तेजी से नीचे गिरे। इसकी मुख्य वजह आईटी और ऑटो शेयरों में आई बड़ी गिरावट थी। इस भारी गिरावट के कारण निवेशकों के लगभग 2.94 लाख करोड़ रुपये डूब गए। इससे बीएसई पर कुल मार्केट कैप घटकर करीब 466 लाख करोड़ रुपये रह गया। दोपहर तक सेंसेक्स 1000 अंकों से ज्यादा गिर गया। निफ्टी 50 में भी 250 अंकों से ज्यादा गिरावट आई। शेयर एक्सपर्ट आशुतोष जैन के मुताबिक बिकवाली होने से शेयर बाजार लड़खड़ा गया है। मंगलवार को बाजार बंद होने तक इसे कुछ उंचाई मिल सकती है।

ये बनें कारण

- मंगलवार को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इंफोसिस और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसी बड़ी आईटी कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त बिकवाली हुई। इसकी वजह यह थी कि एंथ्रोपिक कंपनी ने कहा कि उनका क्लाउड कोड टूल पुराने सिस्टम को आधुनिक बनाने में मदद कर सकता है। एक पुरानी प्रोग्रामिंग भाषा है जो आज भी कई जरूरी सिस्टम में इस्तेमाल होती है।

- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार को लेकर रुख की चिंता ने बाजार में बिकवाली को और बढ़ा दिया। ट्रंप ने सोमवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि जो भी देश हालिया अदालती फैसले के साथ खेल खेलने की कोशिश करेगा, उसे बहुत ज्यादा टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। उनके ये बयान तब आए जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को टैरिफ को रद्द कर दिया था। इसके जवाब में ट्रंप ने कहा कि वे अब ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 के सेक्शन 122 के तहत 15 का ग्लोबल टैरिफ लगाएंगे।

- एशियाई शेयर बाजारों में भी गिरावट देखी गई। वॉल स्ट्रीट पर रात भर हुई बिकवाली ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया था। डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर अनिश्चितता और बढ़ती भू-राजनीतिक तनावों ने बाज़ार की चाल को और धीमा कर दिया। एशिया.पैसेफिक एक्स जापान इंडेक्स छह दिनों की तेजी के बाद गिर गया। अमेरिका में रात भर के कारोबार में इंडेक्स 1.0 गिर गया। नैस्डैक कंपोजिट ने भी 1.1 का गोता लगाया।

- यह गिरावट निफ्टी 50 डेरिवेटिव्स की साप्ताहिक एक्सपायरी के साथ आई है। यह वो समय होता है जब ट्रेडर्स आमतौर पर अपनी पोजीशन को स्क्वायर ऑफ करते हैं या रोल ओवर करते हैं। जब बड़े ऑप्शन्स की पोजीशन एडजस्ट की जाती है, तो अंडरलाइंग इंडेक्स  में सामान्य से ज्यादा बड़ी हलचल देखी जा सकती है। लॉन्ग पोजीशन को खत्म करने और नई हेजिंग एक्टिविटी से बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।

- भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.07 गिरकर 9.95 पर आ गया। रुपये का गिरना विदेशी पूंजी के बाहर जाने का कारण बन सकता है, जिससे इक्विटी यानी शेयर बाजार पर दबाव पड़ा सकता है। कमजोर रुपया आयात की लागत को भी बढ़ा देता है, खासकर कच्चे तेल की। यह कंपनियों की कमाई की उम्मीदों को कम कर सकता है और बाजार के सेंटिमेंट को खराब कर सकता है।

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