जबलपुर। नए साल के जश्न के बीच जबलपुर के सिहोरा क्षेत्र में महिलाओं ने कानून हाथ में लेने के बजाय सजग प्रहरी की भूमिका निभाते हुए अवैध शराब के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को सिहोरा के निकट ग्राम खमरिया और आसपास की महिलाओं ने उस समय साहस का परिचय दिया जब एक शराब तस्कर गांव में घुसने की कोशिश कर रहा था। महिलाओं ने न केवल तस्कर को रोका, बल्कि उसकी एक्टिवा से शराब उतारकर बीच सड़क पर फोड़ दी। यह घटना क्षेत्र में बढ़ते अवैध नशे के खिलाफ एक बड़े सामाजिक विद्रोह का संकेत दे रही है। लंबे समय से पुलिस की सुस्ती और प्रशासन की अनदेखी से परेशान ग्रामीण महिलाओं ने अब खुद ही अपने गांव को नशामुक्त बनाने का संकल्प ले लिया है।
सिस्टम की नाकामी और महिलाओं का अल्टीमेटम
क्षेत्र की महिलाओं का गुस्सा केवल तस्करों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका मुख्य निशाना पुलिस और आबकारी विभाग की निष्क्रियता है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पिछले साल अक्टूबर में सिहोरा थाने का घेराव करने के बाद भी प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए। महिलाओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि आश्वासन का दौर अब खत्म हो चुका है; यदि अब भी अवैध अड्डों पर ताले नहीं लटके, तो आंदोलन की आग जिला मुख्यालय तक पहुंचेगी। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पुलिस की मिलीभगत के बिना गांव की गलियों तक शराब पहुंचना मुमकिन नहीं है।
बर्बाद होता बचपन और सामाजिक सुरक्षा पर संकट
अवैध शराब ने न केवल गांवों की शांति भंग की है, बल्कि युवाओं और बच्चों के भविष्य पर भी ग्रहण लगा दिया है। ग्रामीणों के मुताबिक, शराब की आसान उपलब्धता के कारण मारपीट की घटनाएं आम हो गई हैं और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहने से महिलाओं का घर से निकलना दूभर हो गया है। सबसे भयावह पहलू शिक्षा पर पड़ने वाला प्रभाव है; कई परिवार इस अवैध धंधे को कमाई का जरिया बनाकर बच्चों को स्कूल भेजने के बजाय तस्करी में धकेल रहे हैं। शांति बाई जैसी जागरूक महिलाओं का कहना है कि यह लड़ाई अब केवल शराब के खिलाफ नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व और बच्चों के भविष्य को बचाने की लड़ाई बन चुकी है।
