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अडानी थर्मल को राहत: हाई कोर्ट ने अपर्याप्त दस्तावेजों के आधार पर खारिज की याचिका


जबलपुर।
मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थापित हो रहे अडानी थर्मल पावर प्लांट के खिलाफ दायर जनहित याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिका में प्रस्तुत किए गए दस्तावेज उठाए गए मुद्दों के अनुरूप पर्याप्त नहीं थे। अदालत ने टिप्पणी की कि याचिका में मुद्दा कुछ और था, जबकि संलग्न दस्तावेज और पेश की जा रही दलीलें अलग थीं। यह याचिका कोतमा के पूर्व विधायक सुनील सराफ द्वारा दाखिल की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि अनूपपुर के कोतमा में आदिवासियों की जमीन पर ग्राम सभा की अनुमति के बिना पावर प्लांट लगाया जा रहा है, जो उनके जल, जंगल और जमीन के अधिकारों का उल्लंघन है। साथ ही, यह दावा भी किया गया था कि केवई नदी पर कंपनी ने चुपचाप बांध बना लिया है, जिससे दर्जनों गांवों में जल संकट गहरा सकता है।

डॉ. अंबेडकर मूर्ति की चुनौती वाली याचिका भी वापस, केस खारिज

​इसी सुनवाई के दौरान एक अन्य मामले में भी कोर्ट ने फैसला सुनाया। बुरहानपुर रेलवे स्टेशन के सामने डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति लगाने के निर्णय को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को भी डिवीजन बेंच ने खारिज कर दिया है। यह याचिका याचिकाकर्ता द्वारा वापस लेने के आधार पर बंद की गई। बुरहानपुर के वार्ड मेंबर दीपक बरगड़िया द्वारा दायर इस याचिका में दावा किया गया था कि कलेक्टर द्वारा प्रतिमा लगाने के लिए दी गई अनुमति से स्थानीय यातायात व्यवस्था प्रभावित होगी। हालांकि, सुनवाई के बाद कोर्ट ने इस मामले को भी समाप्त कर दिया।

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