जबलपुर रेलवे का 'सुपरफास्ट' भ्रष्टाचार: सुबह परीक्षा का नतीजा, शाम को मनचाही कुर्सी पर कब्जा!


जबलपुर।
 पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर रेल मंडल में सीसीटीएस परीक्षा के परिणामों और उसके बाद हुई पदोन्नति प्रक्रिया ने रेलवे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि 31 दिसंबर की रात को जब दुनिया नए साल के जश्न की तैयारी कर रही थी, तब कार्मिक विभाग में नियमों को ताक पर रखकर 'पसंदीदा' कर्मचारियों को उपकृत करने का खेल चल रहा था। एक ही दिन में परीक्षा परिणाम जारी होना और उसी दिन पोस्टिंग की लिस्ट निकल जाना, रेलवे के इतिहास में किसी 'चमत्कार' से कम नहीं माना जा रहा है।

रात 9:30 बजे तक खुला दफ्तर: क्या प्री-प्लान्ड थी पूरी प्रक्रिया

 आमतौर पर शाम 6 बजे बंद होने वाला कार्मिक विभाग 31 दिसंबर की रात 9:30 बजे तक किसके इशारे पर खुला रहा। यह सवाल अब चर्चा का विषय बना हुआ है। कर्मचारियों का आरोप है कि पदोन्नति की लिस्ट पहले से ही तैयार थी और परीक्षा परिणाम तो महज एक औपचारिकता थी। सूत्रों के अनुसार, कुछ खास अभ्यर्थियों ने विभाग के बाबू स्तर के कर्मचारियों से सांठगांठ कर अपनी पसंद के स्टेशन और पद पहले ही सुरक्षित कर लिए थे। यह सब इतनी गोपनीयता और जल्दबाजी में किया गया कि किसी को आपत्ति दर्ज करने का मौका तक नहीं मिला।

 सीनियरिटी दरकिनार, अपात्रों की मौज: सूची में अभी भी चल रहा 'संशोधन' का खेल 

इस पूरी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा नुकसान उन ईमानदार और वरिष्ठ कर्मचारियों का हुआ है, जो अपनी योग्यता के दम पर पदोन्नति की आस लगाए बैठे थे। पात्रता रखने वाले कई सीनियर कर्मचारियों को लिस्ट से बाहर कर दिया गया है, जबकि कनिष्ठ (Junior) कर्मचारियों को मलाईदार पोस्टिंग दे दी गई। इतना ही नहीं, मामला उजागर होने के बाद अब उस लिस्ट में गुपचुप तरीके से 'संशोधन' किए जा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि एक बड़ा आर्थिक भ्रष्टाचार है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी अनिवार्य है।

​इसलिए गहरा रहा है शक 

जिस दिन परिणाम आया, उसी दिन पोस्टिंग ऑर्डर भी जारी।​ वरिष्ठता को किनारे कर चहेतों को तरजीह। विभागीय गोपनीय जानकारी कुछ अभ्यर्थियों तक पहले ही पहुँचने का आरोप। कर्मचारी संगठनों ने इस पूरे 'पदोन्नति कांड' की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

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