करोड़ों की जमीन, लाखों का स्टाम्प: विधायक संजय पाठक की पत्नी पर बड़ा आरोप!


4 करोड़ की जमीन का सौदा महज 96 लाख में दिखाया, कलेक्टर ने थमाया नोटिस,जवाब के बाद होगा आगे एक्शन

जबलपुर । मध्य प्रदेश के सबसे अमीर विधायक और कद्दावर खनन कारोबारी संजय पाठक एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। इस बार मामला उनकी पत्नी निधि पाठक से जुड़ा है, जिन पर करोड़ों रुपये की जमीन की रजिस्ट्री में लाखों रुपये के स्टाम्प और पंजीयन शुल्क की चोरी करने का गंभीर आरोप लगा है। इस कथित फर्जीवाड़े की शिकायत के बाद कलेक्टर न्यायालय,स्टाम्प ने कड़ा रुख अपनाते हुए निधि पाठक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

-​क्या है पूरा मामला और कैसे की गई प्लानिंग

​यह मामला कटनी नगर निगम सीमा के अंतर्गत महाराणा प्रताप वार्ड की एक बेशकीमती जमीन से जुड़ा है। आरोप है कि वंदना सरावगी नामक महिला से खरीदी गई 10,400 वर्गफीट की इस जमीन को दो अलग-अलग टुकड़ों में खरीदकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया। नियमानुसार, यदि कोई एक चक (एक ही हिस्सा) जमीन है, तो उस पर सड़क की मुख्य गाइडलाइन के हिसाब से टैक्स लगता है। लेकिन यहाँ आरोप है कि मुख्य सड़क की महंगी गाइडलाइन से बचने के लिए एक ही जमीन को दो हिस्सों में बांटकर महज चार दिनों के अंतराल में दो अलग-अलग सेल डीड (विक्रय पत्र) तैयार करवाए गए।

-​टुकड़ों में रजिस्ट्री कर बचाया भारी राजस्व

​शिकायतकर्ता राजू गुप्ता के अनुसार, निधि पाठक ने पहली रजिस्ट्री 20 दिसंबर 2021 को 1050 वर्गफीट के लिए की और दूसरी 24 दिसंबर 2021 को 9350 वर्गफीट के लिए की। खेल यहीं से शुरू हुआ। सबसे पहले जमीन के पिछले हिस्से (9350 वर्गफीट) को खरीदा गया, जिसकी तत्कालीन गाइडलाइन दर केवल 6,600 रुपये प्रति वर्गमीटर थी। इसके ठीक चार दिन बाद आगे के हिस्से (1050 वर्गफीट) की रजिस्ट्री की गई, जहां गाइडलाइन दर 40,000 रुपये प्रति वर्गमीटर थी। यदि यह जमीन एक साथ खरीदी जाती, तो पूरी 10,400 वर्गफीट जमीन पर महंगी गाइडलाइन दर लागू होती, जिससे स्टाम्प शुल्क करोड़ों में पहुँच जाता।

-​4.26 करोड़ का सौदा महज 96 लाख में!

​दस्तावेजों और शिकायत के आधार पर, यह जमीन डबल रोड की प्राइम लोकेशन पर स्थित है। यदि इसे नियमानुसार एक मुश्त खरीदा जाता, तो इस सौदे का वास्तविक सरकारी मूल्यांकन लगभग 4.26 करोड़ रुपये बैठता, लेकिन टुकड़ों में रजिस्ट्री दिखाने के कारण दोनों सौदे क्रमशः 57.35 लाख और 39.03 लाख रुपये में निपटा दिए गए। यानी करीब 4 करोड़ की जमीन का कागजी मूल्य महज 96 लाख रुपये के आसपास दिखाया गया। इसके अलावा, पंजीयन दस्तावेजों में जमीन की 'चौहद्दी' (चारों तरफ की सीमाएं) भी गलत दर्शाने का आरोप है, ताकि इसे मुख्य सड़क से दूर दिखाया जा सके।

-​कलेक्टर न्यायालय का नोटिस,जवाब तलब

​इस मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय कलेक्टर ऑफ स्टाम्प ने क्रेता निधि पाठक और विक्रेता वंदना सरावगी को नोटिस जारी कर 16 जनवरी तक लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि तय समय सीमा में संतोषजनक जवाब पेश नहीं किया जाता है, तो भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 40 के तहत बकाया मुद्रांक शुल्क की वसूली और भारी जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि संजय पाठक प्रदेश के रसूखदार नेताओं में गिने जाते हैं, ऐसे में उनकी पत्नी पर लगे इन आरोपों ने राजनीतिक गलियारों और प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज कर दी है।

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