जबलपुर। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने तकनीकी नवाचार और डिजिटल सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने अपनी पुरानी ईमेल व्यवस्था को पूरी तरह से अलविदा कहते हुए अब आधिकारिक संचार के लिए स्वदेशी तकनीक आधारित जोहो कॉर्पोरेशन के प्लेटफॉर्म को अपना लिया है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य विदेशी प्लेटफॉर्म पर निर्भरता कम करना और डेटा संप्रभुता को मजबूत बनाना है।
स्वदेशी तकनीक से बढ़ेगी नेटवर्क की सुरक्षा
एमपी ट्रांसको के आईटी हेड, डॉ. हिमांशु श्रीवास्तव ने बताया कि जोहो प्लेटफॉर्म पर ईमेल शिफ्ट होने से कंपनी की डिजिटल कार्यप्रणाली में कई क्रांतिकारी बदलाव आएंगे। यह नया सिस्टम न केवल सुरक्षित डेटा होस्टिंग प्रदान करता है, बल्कि इसमें उन्नत स्पैम सुरक्षा और साइबर सुरक्षा के बेहतरीन फीचर्स मौजूद हैं। यह कदम भारत सरकार के 'डिजिटल इंडिया' और आत्मनिर्भर भारत अभियान के संकल्पों को धरातल पर उतारने का एक प्रयास है। उल्लेखनीय है कि एमपी ट्रांसको पिछले कुछ समय से लगातार स्वदेशी तकनीकों को प्राथमिकता दे रहा है। ईमेल सिस्टम से पहले कंपनी ने अराताई प्लेटफॉर्म को अपनाया था। इसके अतिरिक्त, पावर ट्रांसमिशन के लिए सबसे संवेदनशील माने जाने वाले स्काडा सिस्टम को भी पूरी तरह स्वदेशी उपकरणों की मदद से अपग्रेड किया जा चुका है। इन बदलावों के कारण अब प्रदेश के ट्रांसमिशन नेटवर्क की रियल-टाइम मॉनिटरिंग पहले से अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित हो गई है। कंपनी की इस पहल से न केवल डेटा की गोपनीयता सुनिश्चित होगी, बल्कि भविष्य में साइबर हमलों के खतरों को भी प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा।
