जबलपुर। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और मिनी कार्यकर्ता के 4767 पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। हालांकि, इस भर्ती प्रक्रिया में दिव्यांग महिलाओं के लिए किसी भी विशेष छूट या प्राथमिकता का प्रावधान नहीं किया गया है, जिससे आवेदकों में भारी निराशा है। हैरानी की बात यह है कि दिव्यांगजन आयुक्त ने भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही विभाग को पत्र लिखकर स्पष्ट सिफारिश की थी कि इन पदों पर दिव्यांग महिलाओं को अतिरिक्त अंक या अन्य लाभ दिए जाएं। इसके बावजूद, विभाग ने इस अनुशंसा को नजरअंदाज करते हुए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
अन्य श्रेणियों को मिल रही छूट, दिव्यांगों की अनदेखी
वर्तमान भर्ती व्यवस्था के तहत अनुसूचित जाति, जनजाति, बीपीएल, विधवा और तलाकशुदा महिलाओं को मेरिट सूची में 5 से 10 अंकों की छूट दी जा रही है। दिव्यांगजन आयुक्त का तर्क था कि इसी आधार पर दिव्यांग महिलाओं को भी उचित लाभ मिलना चाहिए। विभाग द्वारा इसे शामिल न करना दिव्यांगों के अधिकारों के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाता है।
कानून के उद्देश्यों के विपरीत विभाग का निर्णय
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगों को समान अवसर और सामाजिक सहभागिता प्रदान करना है। जानकारों का कहना है कि आंगनबाड़ी जैसी महत्वपूर्ण जमीनी योजनाओं में दिव्यांग महिलाओं को अवसर न देना इस कानून की भावना के खिलाफ है। भले ही ये नियुक्तियां मानदेय आधारित हैं, फिर भी सशक्तिकरण की दिशा में दिव्यांग महिलाओं को अवसर देना अनिवार्य होना चाहिए था।
