
जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में आज मध्य प्रदेश आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संघ की ओर से महासचिव संगीता श्रीवास्तव ने समान काम हेतु समान वेतनमान एवं उन्हें तृतीय श्रेणी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग हेतु याचिका दाखिल की है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद अली एवं अधिवक्ता अमित रायजादा ने बताया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी सहायकों को सरकारी कर्मचारी माना जाए और उन्हें सरकारी कर्मचारियों के समान सभी सुविधाएं जैसे नियमित वेतन, वेतनवृद्धि, अवकाश सुविधाएं, टीए, डी.ए, एच.आर.ए आदि प्रदान की जाएं, क्योकि राज्य शासन द्वारा जारी दिशानिर्देश के भाग तीन और भाग चार में इन सुविधाओं का आश्वासन दिया गया है एवं राज्य शासन द्वारा इन कार्यकर्ताओं को शासकीय सेवक की तरह अतिरिक्त कार्यबल के रूप में इस्तेमाल कर उन्हें बी.एल.ओ., जनगणना जैसे अतिरिक्त कर्तव्यों को करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो सरकारी परिपत्रों के विपरीत हैं।
आंगनवाडी कार्यकर्ता दशकों से इस रूप में कार्यरत हैं और राज्य को उनकी सेवाओं की नियमित आवश्यकता है, लेकिन इन कर्मचारियों के लिए नियमित कैडर सृजित न करते हुए उनका शोषण किया जा रहा है। याचिकाकर्ता समान काम के लिए समान वेतन के आधार पर आदेश एवं निर्देश प्रदान करने की मांग माननीय न्यायालय से कर रहा है । यचिकाकर्ता का यह भी कथन है कि राज्य शासन आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी सहायकों को सरकारी कर्मचारी मानाकर उन्हें सरकारी कर्मचारियों के समान सभी सुविधाएं जैसे नियमित वेतन, वेतनवृद्धि, अवकाश सुविधाएं, टीए, डी.ए, एच.आर.ए आदि प्रदान की करे क्योक राज्य शासन द्वारा जारी दिशानिर्देश के भाग तीन और भाग चार में इन सुविधाओं का आश्वासन दिया गया है। राज्य शासन द्वारा इन कार्यकर्ताओं को गुलामों की तरह अतिरिक्त कार्यबल के रूप में इस्तेमाल करने और उन्हें बी.एल.ओ. या जनगणना जैसे अतिरिक्त कर्तव्यों को करने के लिए मजबूर करते हैं, जोकि सरकारी परिपत्रों के विपरीत हैं। ये कार्यकर्ता दशकों से इस रूप में कार्यरत हैं और राज्य को उनकी सेवाओं की नियमित आवश्यकता है, लेकिन इन कर्मचारियों के लिए नियमित कैडर सृजित न करने और उनके शोषण को जारी रखने के बावजूद, वे नियमित कैडर के सरकारी कर्मचारियों के समान सुविधाओं और लाभों के हकदार हैं। उन्हें नियमित कैडर के सरकारी कर्मचारियों के समान सुविधाओं और लाभ नहीं दिया जा रहा। प्रकरण में सुनवाई के पश्चात आज माननीय न्यायमूर्ति विशाल धागट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।