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यूरोप के 27 देशों में पहुंचेगा 'मेड इन इंडिया' का जलवा; टेक्सटाइल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक को बड़ा फायदा


कैट की जबलपुर इकाई ने किया स्वागत

जबलपुर: भारत और यूरोपीय संघ (के बीच हुआ हालिया व्यापार समझौता देश की वैश्विक आर्थिक सहभागिता में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। चांदनी चौक के सांसद और कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स  के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का प्रतीक बताया है। उनके अनुसार, यह समझौता भारत को एक विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करेगा, जिससे भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक समूहों में से एक के दरवाजे खुल जाएंगे। संगठन की जबलपुर इकाई ने इस समझौते का स्वागत किया है।

निर्यात में 6.4 लाख करोड़ की भारी बढ़ोतरी का अनुमान

​इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू भारत के निर्यात में होने वाली भारी वृद्धि है। विशेषज्ञों और कैट के पदाधिकारियों के अनुसार, इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारत से होने वाले सालाना निर्यात में 6.4 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है। यह न केवल विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करेगा, बल्कि भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की ओर भी तेजी से ले जाएगा। टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं कम होने से भारतीय उत्पाद यूरोपीय बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकेंगे।

इन क्षेत्रों को मिलेगा वैश्विक बाजार और नई तकनीक

​कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी. सी. भरतिया और प्रदेश अध्यक्ष सुनील अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि इस समझौते से विशेष रूप से एमएसएमई और स्टार्टअप्स को लाभ होगा। भविष्य में भारतीय कपड़ों की मांग यूरोप में बढ़ेगी। तकनीकी हस्तांतरण से मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती मिलेगी। भारतीय दवाओं की सुगम पहुंच सुनिश्चित होगी।  पारंपरिक कारीगरों को वैश्विक मंच मिलेगा व लेदर, केमिकल्स, मरीन प्रोडक्ट्स, एग्री प्रोडक्ट्स, चाय और स्पोर्ट्स गुड्स।

रोजगार सृजन और 'आत्मनिर्भर भारत' को मजबूती

​संगठन के जबलपुर के विभिन्न पदाधिकारियों जितेंद्र पचौरी, संदेश जैन, दीपक सेठी, रोहित खटवानी और सीमा सिंह चौहान ने संयुक्त रूप से कहा कि यह समझौता भारत को 'ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब' बनाने के विजन के अनुरूप है। जिला स्तर के पदाधिकारियों राजीव बड़ेरिया, संजय चड्ढा और मनोज जसाठी ने जोर देकर कहा कि इससे न केवल बड़े उद्योगों को, बल्कि छोटे व्यापारियों और किसानों को भी समावेशी विकास के अवसर मिलेंगे। इससे बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश  में भी सुधार होगा।

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