जबलपुर। महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने देश में चल रहे षड्यंत्रकारी मतांतरण के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार करते हुए एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। उन्होंने देश की समस्त राज्य सरकारों से आह्वान किया है कि वे "धर्म स्वातंत्र्य विधेयक" के माध्यम से इस पर तत्काल प्रभावी रोक लगाएं। दिल्ली में आयोजित विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यक्रम में स्वामी जी ने स्पष्ट मांग की है कि धोखे, छल-कपट, लोभ-लालच या किसी भी प्रकार के प्रलोभन से किए जाने वाले धर्मांतरण को कानूनी रूप से गंभीर अपराध घोषित किया जाए और इसके लिए कठोरतम दंड का प्रावधान सुनिश्चित हो। स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने सनातन धर्मशास्त्रों का हवाला देते हुए कहा कि धर्म परिवर्तन को पाप की श्रेणी में रखा गया है, जो व्यक्ति और समाज दोनों के लिए अहितकर है। उन्होंने समाज का ध्यान उन लोगों की ओर आकृष्ट किया जो किसी विवशता या षड्यंत्र का शिकार होकर अपने मूल धर्म से दूर हो गए हैं।
घर वापिसी अभियान चले
स्वामी जी ने पुरजोर वकालत की कि ऐसे लोगों के लिए व्यापक स्तर पर "घर वापसी" अभियान चलाया जाना चाहिए ताकि उन्हें पुनः सनातन की मुख्य धारा और हिंदुत्व में ससम्मान वापस लाया जा सके। उन्होंने एक महत्वपूर्ण वैचारिक स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि घर वापसी की इस प्रक्रिया को 'धर्मांतरण' कहना अनुचित है। यह वास्तव में "परावर्तन संस्कार" है, अर्थात अपने मूल स्वरूप और जड़ों की ओर लौटना। उनका मत है कि अनैतिक मतांतरण राष्ट्र और संस्कृति की अखंडता के लिए घातक है, जिसे रोकने के लिए कड़े विधायी कदमों की महती आवश्यकता है।
