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अफसरों की बेबसी, दागी मिलर्स से मांगे जा रहे बारदाने

 


बारदानों की भारी कमी से प्रशासन की मुश्किलें बढ़ीं

जबलपुर। धान खरीदी सीजन के बीच प्रशासन बारदानों की भारी कमी से जूझ रहा है। जिले में खरीदे जा रहे धान को सुरक्षित रखने के लिए दो करोड़ से अधिक बारदानों की आवश्यकता है, लेकिन उपलब्धता बेहद सीमित है। कमी इतनी गंभीर है कि अफसरों को विवश होकर उन्हीं दागी मिलर्स से पुराने बारदाने मांगने पड़े हैं, जिनकी मिलिंग इस बार स्वीकार ही नहीं की गई।

बारदाना संकट में घिरे अफसर

बारदानों के अभाव में जब स्थिति अनियंत्रित होने लगी तो प्रशासन ने जिले के मिलर्स को पुराने बारदाने उपलब्ध कराने के लिए कहा। लेकिन जिन मिलर्स पर पिछले वर्षों में हेराफेरी, गड़बड़ी और निर्धारित मानकों के उल्लंघन के आरोप लगे थे, वे इस बार मिलिंग से बाहर कर दिए गए हैं। इसके बावजूद अफसरों को उन्हीं मिलर्स के दरवाजे पर बारदाने की गुहार लगानी पड़ रही है। मिलर्स का तर्क है कि जब एफआईआर, एफएसएआई और विभागीय जांच में उन्हें दोषी नहीं पाया गया है, तो उन्हें बार-बार कटघरे में खड़ा करना सही नहीं है। इससे प्रशासन और मिलर्स के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।

गोदामों में रखा धान खराब होने की कगार पर

जिले के गोदामों में करीब साढ़े 16 लाख क्विंटल धान रखा हुआ है, जिनमें से कई बोरों में कीड़े लगने और बोरों के फटने की शिकायतें सामने आ रही हैं। पर्याप्त बारदाने न मिलने के कारण धान को सुरक्षित रखना चुनौती बन गया है, और नुकसान की आशंका बढ़ती जा रही है। प्रशासन का कहना है कि बारदानों की व्यवस्था सुधारने के प्रयास कर रहा है, लेकिन मांग इतनी अधिक और उपलब्धता इतनी कम है कि समस्या का समाधान तुरंत संभव नहीं है। बारदाने के संकट ने इस सीजन की खरीदी व्यवस्था को गहरी दिक्कतों में डाल दिया है।

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