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सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध, निगम ने बिठाया पहरा


जबलपुर।
नगर निगम सीमाअंतर्गत पॉलीस्टाइरीन और विस्तारित पॉलीस्टाइरीन वस्तुओं सहित 19 चिन्हित सिंगल यूज प्लास्टिक वस्तुओं को 4 श्रेणियों के निर्माण, आयात, भण्डारण वितरण, विक्रय और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। निगम ने इसकी जांच के लिए दल गठित कर दिया है, जो शहरी सीमा में सतत नजर रखेगा। निगमायुक्त ने बताया कि बार-बार अमानक पॉलीस्टाइरीन मिलने पर प्रतिष्ठान को सील कर दिया जाएगा। 

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने शासन के निर्देशों के अनुरूप नगर निगम सीमा के भीतर सिंगल यूज प्लास्टिक पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह सख्त आदेश पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 5 के अंतर्गत जारी किया गया है। निगमायुक्त ने स्पष्ट किया कि अब नगर निगम क्षेत्र में पॉलीस्टाइरीन और विस्तारित पॉलीस्टाइरीन वस्तुओं सहित 19 चिन्हित सिंगल यूज प्लास्टिक वस्तुओं का निर्माण, आयात, भंडारण, वितरण, क्रय, विक्रय और उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा।


प्रतिबंधित 19 वस्तुओं को 4 मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिसमें स्टिक्स के अंतर्गत इयर बड्स, गुब्बारों के लिए प्लास्टिक स्टिक्स, आइसक्रीम स्टिक्स और कैंडी स्टिक्स। कटलरी के अंतर्गत प्लास्टिक के कप, प्लेट, गिलास, कांटे, चम्मच, चाकू, ट्रे, स्ट्रॉ और स्टिरर। रैपिंग/पैकेजिंग फिल्म के अंतर्गत मिठाई के डिब्बे, निमंत्रण पत्र और सिगरेट पैकेट को रैप करने वाली प्लास्टिक फिल्म एवं अन्य वस्तुएं जिसमें प्लास्टिक के झंडे, थर्मोकोल की सजावटी सामग्री, और 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक या पीवीसी बैनर आदि।

इस प्रतिबंध के सख्त प्रवर्तन को सुनिश्चित करने के लिए निगमायुक्त ने विशेष निरीक्षण दलों का गठन किया है। ये दल शहर भर में व्यापारियों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और आम जनता के बीच आदेश के अनुपालन की निगरानी करेंगे। नियमों का उल्लंघन करने पर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। जैव अनाश्य अपशिष्ट अधिनियम, 2004 के प्रावधानों के अनुसार, उल्लंघनकर्ता पर मौके पर ही (स्पॉट फाइन) जुर्माना लगाया जाएगा और प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक सामग्री को तुरंत जब्त कर लिया जाएगा। निगमायुक्त ने हिदायत दी है कि बार-बार उल्लंघन करने की स्थिति में प्रतिष्ठान को सील करने और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत कानूनी अभियोजन की कार्रवाई की जाएगी।


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