हाईकोर्ट: कोविड योद्धा कल्याण योजना में लंबित आवेदन 90 दिनों में निपटाने के निर्देश,दिवंगत एसएएफ कॉन्स्टेबल जहां सिंह के मामले में याचिका का निपटारा
जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की एकलपीठ, न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने मुख्यमंत्री COVID-19 योद्धा कल्याण योजना से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में आज अहम आदेश जारी किया। यह मामला दिवंगत जहाँ सिंह, कॉन्स्टेबल नंबर 980 (13वीं बटालियन, एसएएफ ग्वालियर) की मृत्यु से जुड़ा है, जिनका देहांत 26 नवंबर 2020 को कोविड संक्रमण के दौरान ड्यूटी पर रहते हुआ था। उनकी पत्नी राजा बेटी द्वारा दायर की गई याचिका (WP-43629-2025) पर कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि सरकार 90 दिनों के भीतर मामले का अंतिम निपटारा करे।
मामले की पृष्ठभूमि
दिवंगत कॉन्स्टेबल जहां सिंह को महामारी के दौरान भोपाल स्थित ईओडब्ल्यू कार्यालय में हथियार और गोला-बारूद की सुरक्षा के लिए नियुक्त किया गया था। कोरोना संक्रमण के दौरान ड्यूटी निभाते हुए उनकी मृत्यु हो जाने पर, पत्नी राजा बेटी ने सरकार से कोविड योद्धा कल्याण योजना का लाभ देने की मांग की थी। उनका कहना था कि योजना के तहत मिलने वाले आर्थिक लाभ और सहायता के लिए दिया हुआ आवेदन चार साल से लंबित है।
-याचिकाकर्ता की फरियाद
उनके पति को कोविड योद्धा के रूप में मान्यता देते हुए योजना के सभी लाभ तुरंत स्वीकृत किए जाएं। आवेदन की पात्रता तिथि से वास्तविक भुगतान तक 9% वार्षिक ब्याज दिया जाए। देरी के लिए याचिका की लागत (कॉस्ट) भी प्रदान की जाए।
-सरकार की ओर से क्या कहा गया
राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया किआवेदन पर अंतिम निर्णय लिया गया है या नहीं।इस संबंध में रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि निर्णय लिया जा चुका है तो आदेश याचिकाकर्ता को शीघ्र भेजा जाएगाऔर यदि अभी निर्णय लंबित है, तो उसे समयबद्ध रूप से पूरा किया जाएगा।
-बेहद अहम है कोर्ट का ये आदेश
न्यायालय ने मामले का निपटारा करते हुए प्रतिवादी क्रमांक 1 और 8 (राज्य शासन एवं संबंधित विभाग) को आदेश दिया कि याचिकाकर्ता के आवेदन पर यदि निर्णय लंबित है, तो अधिकतम 90 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय लिया जाए। निर्णय होने पर आदेश की सूचना याचिकाकर्ता को अनिवार्य रूप से दी जाए। कोविड अवधि में ड्यूटी करते हुए जान गंवाने वाले सुरक्षा बलों के परिजनों से जुड़े मामलों में यह आदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय से लंबित फाइलों और प्रक्रियागत देरी पर हाईकोर्ट का यह निर्देश सरकार के लिए सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।यह आदेश उन सभी पीड़ित परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है, जिनके आवेदन महामारी के चार साल बाद भी सरकारी दफ्तरों में धूल खा रहे हैं।
