निगमायुक्त ने शुरू कराई जांच,पीएम आवास के सर्वे में भी लगे ये कर्मचारी, विभागीय काम छोड़े आधे-अधूरे
जबलपुर। आउटसोर्सिंग के जरिए जिन कम्प्यूटर ऑपरेटरों को नगर निगम के विभिन्न विभागों के काम करने के लिए रखा गया है, वे ऑपरेटर अधिकारियों के निजी ऑपरेटर की भूमिका निभाने में जुटे हुए हैं। निगमायुक्त ने इस आशय की शिकायत की जांच शुरु कराई है। अपर आयुक्त अरविंद शाह ने इन ऑपरेटरों से इनका काम और टाइमिंग की जानकारी ली है,अब जल्दी ही कार्रवाई की जाएगी।
-क्या-क्या कर रहे ऑपरेटर
अपर आयुक्त ने जब इन ऑपरेटरों से जानकारी ली तो खुलासा हुआ कि इन ऑपरेटरों से पीएम आवास योजना का सर्वे भी कराया जा रहा है,जबकि इनका वेतन महज एक ऑपरेटर जितना है। आखिर ऐसी नौबत कैसे आई कि ननि प्रशासन को इन ऑपरेटरों से रूबरू होकर बात करनी पड़ी। बताया गया है कि जब निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने देखा कि इनकी तादाद चार सौ से ज्यादा हो चुकी है इसलिए उन्होंने इनके कामकाज के बारे में जानने के लिए अपर आयुक्त श्री शाह को निर्देशित किया।
-कई ऑपरेटरों को हटाने का है प्लान
आउटसोर्सिंग के जरिए नगर निगम में काम कर रहे इतने ऑपरेटरों की वाकई कार्यालय को जरूरत है या नहीं, ये जल्दी ही तय किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि तत्कालीन महापौर प्रभात साहू के कार्यकाल में पहली बार ठेके पर कंम्पयूटर ऑपरेटर तैनात किए गये थे, इसके बाद संख्या बढ़ती गयी और लगातार बढ़ती जा रही है। जानकारी के अनुसार, इन ऑपरेटर्स में से उनकी शामत आने वाली है, जो अपने काम से गोल रहते हैं और किसी अधिकारी क लिए काम के बहाने से कार्यालय से निकल जाते हैं। हालाकि, इन ऑपरेटर्स में से कुछ ऐसे भी हैं,जो अपना काम अच्छे से कर रहे हैं और इन पर ही सारा लोड डाला जा रहा है। अपर आयुक्त द्वारा सूचियां तैयार की गयी हैं,जिन पर निगम प्रशासन द्वारा निर्णय लिया जाएगा।
