डीएपी–यूरिया की किल्लत, किसान महंगे दाम पर खरीदने मजबूर
जबलपुर। गेहूं की बोवनी का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, खाद की किल्लत और ब्लैकमेलिंग किसानों की परेशानी बढ़ा रही है। सिंचाई के बाद पहला पानी देने तथा खाद के छिड़काव के लिए किसान खाद खरीदने खेतों से निकल रहे हैं, लेकिन बाजार में महंगे दाम और कमी से उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सहकारी समितियों में सीमित खाद उपलब्ध है, जबकि प्राइवेट डीलर बढ़े हुए दाम पर खाद बेच रहे हैं। परमिट व्यवस्था के बावजूद किसानों को निर्धारित मात्रा से कम खाद मिल रही है, वहीं यूरिया की सप्लाई भी जिले में पर्याप्त नहीं है। गांवों में कई जगह बिना रिकॉर्ड के दुकानें खुलकर अत्यधिक दाम पर खाद बेच रही हैं, जिससे किसानों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि निजी विक्रेताओं की मनमानी के चलते उन्हें खाद के लिए सेंटर लॉक से लेकर गांव-गांव तक भटकना पड़ रहा है। महंगी खाद के कारण उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका से किसान चिंतित हैं। प्रशासन द्वारा निगरानी बढ़ाने की बात कही जा रही है, लेकिन जमीन पर अभी भी हालात सुधारने की आवश्यकता है।
गांव-गांव भर्राशाही,किसान मजबूर
खाद के दामों में बढ़ते अंतर ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी दरों पर डीएपी 1350 रुपए प्रति बोरी और यूरिया 267 रुपए में उपलब्ध होना चाहिए, लेकिन बाजार में यही खाद 300 से 350 रुपए अधिक पर बेची जा रही है, जबकि कुछ जगह डीएपी का भाव 1900 से 2000 रुपए प्रति बोरी तक पहुंच गया है। गांवों में चल रही अनियमित दुकानों और प्राइवेट डीलरों की मनमानी से किसानों को भारी आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ रहा है। बोवनी का समय नजदीक होने के कारण किसान मजबूरी में महंगे दाम चुकाने को विवश हैं।
