डिजिटल हाजिरी अब अनिवार्य: लेटलतीफ शिक्षकों की सैलरी पर बड़ा संकट

 


स्कूलों में ई-हाजिरी पर सख्ती: नेटवर्क न मिलने का बहाना नहीं चलेगा

जबलपुर। मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में अब उपस्थिति प्रणाली पूरी तरह डिजिटल मोड में लागू की जा रही है। हमारे शिक्षक ऐप से जुलाई से ई-हाजिरी अनिवार्य है, लेकिन कई शिक्षक “नेटवर्क न मिलने” का हवाला देकर ऐप से उपस्थिति दर्ज नहीं कर रहे। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अगले माह की सैलरी केवल ऐप पर दर्ज हाजिरी के आधार पर ही जारी होगी। उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद स्कूल शिक्षा विभाग और अधिक सख्त हो गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अतिथि शिक्षक ई-हाजिरी को लेकर अधिक अनुशासित दिखे, जबकि नियमित शिक्षक अनुपालन में सबसे पीछे हैं।

- तीन दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश

जबलपुर सहित सभी जिला शिक्षा अधिकारियों  को आदेश जारी।

बीईओ के साथ मिलकर उन स्कूलों का स्थलीय निरीक्षण (फील्ड विजिट) करना होगा, जहाँ नेटवर्क की शिकायत दी गई है।

ऐसे विद्यालयों की सूची, नेटवर्क समस्या के प्रमाण और अन्य विवरण तीन दिनों में जमा करना अनिवार्य।

रिपोर्ट के आधार पर नेटवर्क सुधार की योजना तैयार की जाएगी।

- ऐप में तकनीकी समस्या नहीं: विभाग

लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक के.के. द्विवेदी ने कहा कि हमारे शिक्षक ऐप पूरी तरह सही है। किसी भी तकनीकी समस्या की पुष्टि नहीं हुई है। इस माह का वेतन केवल ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर ही पर होगा।

- ई-हाजिरी क्यों अनिवार्य?

शिक्षकों की वास्तविक उपस्थिति का पारदर्शी रिकॉर्ड

फर्जी उपस्थिति और पेपर-वर्क की गड़बड़ियों पर रोक

स्कूल मॉनीटरिंग का रियल-टाइम डेटा

न्यायालय के आदेश के पालन में तेजी

-अब बचने की राह नहीं

हाजिरी ऐप पर नहीं—तो वेतन नहीं

नेटवर्क समस्या का बहाना स्वीकार नहीं होगा

सभी स्कूलों के निरीक्षण का आदेश

रिपोर्ट 3 दिन में अनिवार्य


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