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जमीन ना दस्तावेज, सरकारी सिस्टम ने मान लिया किसान

 


धान उपार्जन से पहले ही फर्जीवाड़ा, लखनपुरा सोसायटी में एक दर्जन नकली पंजीयन उजागर,सिहोरा, पनागर, कुंडम में भी गड़बड़ी की आशंका; कलेक्टर ने जांच टीम बनाई

जबलपुर। इस वर्ष धान उपार्जन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही बड़े फर्जीवाड़े का मामला उजागर हुआ है। सिहोरा की लखनपुरा सहकारी सोसायटी में एक दर्जन से ज्यादा ऐसे लोगों के नाम पंजीयन सूची में पाए गए हैं, जिनके पास न तो कृषि भूमि है और न ही उपार्जन के लिए आवश्यक कोई दस्तावेज। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये फर्जी नाम बिना सत्यापन और बिना राजस्व रिकॉर्ड की जांच के सिस्टम में जोड़ दिए गए। सूत्रों के मुताबिक, सोसायटी में पंजीयन के नाम पर बड़े पैमाने पर हेरफेर हुआ है। जिन व्यक्तियों का खेती से कोई संबंध नहीं, उनके नाम भी किसान बताकर पंजीयन में जोड़ दिए गए। इससे यह संदेह और मजबूत हो गया है कि धान उपार्जन शुरू होते ही इन फर्जी नामों का उपयोग अनुचित भुगतान लेने के लिए किया जाता। फर्जी पंजीयन की शिकायत के बाद कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने तत्काल प्रभाव से जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। 

-अफसरों की मिलीभगत के बिना मुमकिन नहीं

सिर्फ लखनपुरा ही नहीं, बल्कि सिहोरा, पनागर, कुंडम और आसपास की तहसीलों में भी इसी तरह के फर्जीवाड़े की आशंका जताई जा रही है। शिकायत के अनुसार, यह काम बिना स्थानीय स्तर के कर्मचारियों की मिलीभगत संभव नहीं है। पंजीयन प्रक्रिया में शामिल कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ चुकी है। एक विशेष टीम गठित की गई है, जो सभी पंजीयनों का राजस्व रिकॉर्ड से मिलान कर जांच करेगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों और सोसायटी प्रबंधकों पर कठोर कार्रवाई की तैयारी है। कलेक्टर श्री सिंह  का कहना है कि उपार्जन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और किसानों के हक का नुकसान करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा।

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