हाईकोर्ट ने दिए संकेत, न्यायमूर्ति बोले, ठोस तथ्यों के बिना प्रतिनिधित्व तय करना तर्कसंगत नहीं
जबलपुर। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष बुधवार को राज्य में प्रमोशन में आरक्षण के मामले पर आज सुनवाई की। याचिकाकर्ता के अनुसार, सरकार ने बिना ठोस आंकड़ों के आरक्षण का प्रतिनिधित्व तय किया है,जिससे विसंगतियां पैदा होने की आशंका है। इसी मुद्दे पर याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा कि सरकार ने बिना यह समझे कि किन वर्गों का वास्तविक प्रतिनिधित्व है? आरक्षण का नियम बना दिया, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के एम नागराज, एम नागराज और जर्नेल सिंह मामलों का हवाला देते हुए कहा कि इन मामलों में यह स्पष्ट किया गया था कि आरक्षण तय करने से पहले आंकड़ों के आधार पर यह देखना जरूरी है कि कौन सा वर्ग अब भी पिछड़ा है और किसका प्रतिनिधित्व कितना है।
-क्रीमी लेयर पर क्या है पेंच
मध्यप्रदेश में लगभग 90 हजार पदों पर प्रमोशन में आरक्षण को लेकर विवाद चल रहा है। बताया जा रहा है कि सरकार ने प्रमोशन आरक्षण लागू करने से पहले वर्गवार आंकड़े प्रस्तुत नहीं किए। अदालत ने सरकार से पूछा कि क्या क्रीमी लेयर हटाकर ही वास्तविक प्रतिनिधित्व तय किया गया है या नहीं। कोर्ट ने कहा कि बिना ठोस आंकड़ों के पिछड़ेपन का निर्धारण मनमाना माना जाएगा। मामले की अगली सुनवाई जल्द तय होगी। कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि यदि सरकार आंकड़े प्रस्तुत नहीं करती, तो नियम रद्द किया जा सकता है।
