वीयू से पेट्रोल पंप संचालक की दो टूक,जब तक भुगतान नहीं, ईंधन नहीं मिलेगा


विश्वविद्यालय में ऑडिट प्रोसेस अटकी, लंबित बिल अटके,स्टाफ परेशान

जबलपुर। नानाजी देशमुख वेटरनरी साइंस यूनिवर्सिटी (वीयू) में ऑडिट प्रक्रिया समय पर पूरी न होने के कारण पेट्रोल–डीजल के बिलों का भुगतान रुक गया है। परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय की सरकारी गाड़ियाँ पेट्रोल पंपों से ईंधन नहीं ले पा रहीं और कई अधिकारी अपनी निजी गाड़ियों से दौड़-भाग करने को मजबूर हैं। हालत यह है कि कुलसचिव सहित अन्य अधिकारी लगातार शिकायत के बाद भी सरकारी वाहन में पेट्रोल नहीं भरवा पा रहे। सूत्रों के अनुसार पेट्रोल पंप संचालक ने करीब एक लाख रुपये से अधिक के लंबित बिल का भुगतान न होने पर विश्वविद्यालय की किसी भी सरकारी गाड़ी में पेट्रोल–डीजल डालने से साफ इंकार कर दिया है। बताया जाता है कि यह स्थिति पहली बार नहीं है—बीते वर्ष भी भुगतान देर से होने पर संचालक ने यही कदम उठाया था। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि ऑडिट पूरा न होने से वित्तीय स्वीकृतियाँ आगे नहीं बढ़ पा रहीं, इसलिए बिल निपटान संभव नहीं हुआ। नए ऑडिटर के आने के बाद ही स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है, लेकिन तब तक अधिकारी खुद की जेब से डीजल–पेट्रोल डलवाकर काम चला रहे हैं।

 बैठक में पंप संचालक को बुलाया

स्थिति इतनी गंभीर है कि कुलगुरु की सरकारी गाड़ी तक में पंप संचालक ने पेट्रोल डालने से मना कर दिया। मजबूरन उन्हें निजी गाड़ी से आवागमन करना पड़ा। कुलगुरु का कार्यालय विश्वविद्यालय परिसर में ही स्थित है, फिर भी समस्या के समाधान के लिए प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जब यह मामला सामने आया, तो वीसी और प्रशासनिक अधिकारियों ने पंप संचालक को बैठक के लिए बुलाया है। विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी डॉ. रमांकर मिश्र का कहना है कि जैसे ही ऑडिट पूरा होगा, भुगतान किया जाएगा और बिलों का निपटान शीघ्र किया जाएगा।इस बीच अधिकारी और कर्मचारी साफ तौर पर कह रहे हैं कि सरकारी सिस्टम की देरी का भुगतान अब हमें अपनी जेब से करना पड़ रहा है।

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